स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने चिकित्सा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में सिर्फ डॉक्टराें की कमी पर ही बात की। कहा, पीएचसी में आयुष और सीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर को तैनात किया जाए। जिला अस्पतालों में विशेषज्ञों को भेजा जाए। यह काम 15 दिन में पूरा हो जाए।
मंडल के चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बरेली जिला अस्पताल को एनएबीएच स्टैंडर्ड पर उच्चीकृत किया जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है। एनएबीएच मानकों पर खरा उतरने के बाद जिला अस्पताल को और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर जिला अस्पताल में इंटर्नशिप कर सकें इसके लिए अनुमति दे दी गई है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला से मंत्री ने पीएचसी और सीएचसी पर तैनात डॉक्टराें के बारे में पूछा तो वह जानकारी नहीं दे पाए। इस पर मंत्री ने कहा कि पीएचसी, सीएचसी पर ड्यूटी लगाने के बाद अगर कहीं डॉक्टराें की कमी लगे तो रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी लगाएं। मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त डॉक्टरों को छोड़ा नहीं जाएगा और जो अच्छा काम करेगा उसका सहयोग किया जाएगा। उन्होंने चारों जिलों में दवाओं की उपलब्धता, ऑक्सीजन, संस्थागत प्रसव, वेंटीलेटर की स्थिति पूछी। कहा, वेंटीलेटर जल्द चालू किया जाए। बैठक में एडी हेल्थ डॉ. प्रमिला गौड़, सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता, एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अलका शर्मा आदि मौजूद रहीं।
हर शनिवार को चलेगा स्वच्छता अभियान
मंत्री ने कहा कि हर शनिवार को पीएचसी, सीएचसी के अलावा अन्य अस्पतालाें में स्वच्छता अभियान चलेगा। डॉक्टर और स्टाफ के सभी लोग सेवाभाव के साथ स्वच्छता का काम करेंगे।
ओपीडी के लिए आईएमए की लेंगे मदद
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर डॉक्टराें की कम संख्या से मरीजों को इलाज मिलने से दिक्कत आ रही हो तो आईएमए से बात करें। विशेषज्ञ चिकित्सकाें को ओपीडी में दो घंटा बैठने के लिए कह सकते हैं। इसके लिए अगर वे भुगतान लेंगे तो वह भी किया जाएगा। उन्हाेंने कहा कि विशेषज्ञों की बहुत जरूरत है।
एक महीने में शुरू हो जाएगी डायलिसिस यूनिट
किडनी के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जिला अस्पताल में एक महीने से अंदर प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर डायलिसिस शुरू हो जाएगी। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। इससे गरीबों को निजी अस्पतालों में नहीं जाना होगा। जिला अस्पताल में कम पैसे में उनका इलाज होने लगेगा। वाराणसी के हैरीटेज अस्पताल को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।