बरेली। किसी के हाथ पर जख्म के कई निशान हों और जरा सी बहस होने पर वह खुद को तकलीफ देने लगे तो सतर्क हो जाएं। यह महज आवेश नहीं, बल्कि गंभीर मनोराेग सेल्फ हार्मिंग बिहैवियर (आत्मक्षति) सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं। मनोचिकित्सक के पास इससे जुड़े मामले पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के मनकक्ष में तैनात मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि आत्मक्षति और आत्महत्या दोनों अलग हैं। आत्मक्षति की स्थिति में व्यक्ति सिर्फ खुद के शरीर को खरोंचकर, बाल नोचकर, थप्पड़ मारकर, चाकू या ब्लेड से घाव कर या अन्य तरीकों से खुद को दर्द पहुंचाता है, लेकिन वह आत्महत्या कभी नहीं करता। दर्द की स्थिति में वह शांत होता है। दर्द ही उसे मानसिक तनाव या तत्कालीन परिस्थिति से निपटने में सहयोग करता है। समय से काउंसलिंग न हो तो यही स्थिति उसके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। अस्पताल में ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर दो माह पूर्व शुरू हुआ। नशे के लती लोगों की काउंसलिंग के दौरान 35 मामले आत्मक्षति के भी आए हैं। इनमें युवा समेत किशोर आयुवर्ग के भी चार शामिल हैं।
इंजेक्शन से नशा करने वालों के हाथों में हुआ अल्सर
डॉ. आशीष के मुताबिक जो लोग इंजेक्शन से नशा करते हैं, अगर उन्हें संबंधित नशा न मिले तो वे हाथ, बाजू, गर्दन में से किसी एक ही जगह कट लगाते हैं। काउंसलिंग में पता चला कि बेतहाशा दर्द उनकी मनोस्थिति को पूर्व में हुए नशे के सापेक्ष अहसास कराता है। कुछ नशेड़ी इंजेक्शन भी इसी घाव में लगाते थे ताकि दर्द और नशा लंबे समय तक बरकरार रहे। इलाज से उनकी हरकतों पर अंकुश लगा।
भावनात्मक दर्द, निराशा, तनाव
से राहत का हानिकारक तरीका
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा खन्ना के मुताबिक आत्मक्षति आमतौर पर तनाव और भावनात्मक दर्द से स्वस्थ तरीके से निपटने में असमर्थता की वजह से होती है। इसमें नकारापन, अकेलापन, घबराहट, क्रोध, अपराधबोध, अस्वीकृति, आत्म घृणा की भावना का मिश्रण होता है। शारीरिक दर्द से इन भावनाओं से ध्यान भटकाने की प्रवृत्ति होती है। इससे राहत के लिए खुद को ही दंड देने जैसी हरकतें करते हैं जो सही नहीं है।
आत्मक्षति के लक्षण
- निशान एक पैटर्न में होते हैं। जैसे ताजा कट, खरोंच, चोट, काटने के निशान या अन्य घाव।
- नुकीली वस्तुएं या स्वयं को चोट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अन्य वस्तुएं होना।
- गर्मी में भी चोट छिपाने के लिए फुल आस्तीन के कपड़े पहनना, जख्म की जगह टैटू बनवाना।
- क्रमवार एक ही जगह पर चोट का लगना, दूसरों के साथ संबंध बनाए रखने में परेशानी।
- ऐसे व्यवहार, भावनाएं उभरना जो तेजी से बदल जाएं, आवेगपूर्ण, तीव्र, अप्रत्याशित होना।
खुद को दर्द देने के तरीके
काउंसलिंग के दौरान नुकीली वस्तु से काटना, खरोंचना, जलती सिगरेट, बीड़ी, गर्म धातु का शरीर पर स्पर्श, त्वचा पर शब्द या प्रतीक उकेरना, खुद को थप्पड़ मारना, काटना, सिर पर चोट मारना, त्वचा को नुकीली वस्तु से छेदना आदि तरीकों के इस्तेमाल की जानकारी मिली। ब्यूरो