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धान का मोटा बीज मंगवाया, फिर किसानों के बजाय दुकानदारों के यहां खपाया!

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बरेली। किसानों के लिए आया करीब 14 सौ क्ंिवटल धान का बीज आखिर कहां खपाया गया। ऐसा मामला सामने आया है कि कृषि विभाग ने करीब दो माह पहले जानबूझकर धान का मोटा बीज मंगवाया, जिसकी कोई डिमांड नहीं थी। बाद में विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलकर इसे प्राइवेट दुकानदारों के यहां बेच दिया। अब कुछ चहेते और फर्जी किसानों के नाम दर्ज कर उसकी सब्सिडी का बंदरबांट किया जा रहा है। इस संबंध में कृषि अधिकारियों का कहना है कि किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनीफिट सिस्टम यानी डीबीटी से सब्सिडी की धनराशि दी जानी है। इससे पहले बीज बिक्री रजिस्टर में दर्ज किसानों का सत्यापन कराया जा जाएगा।
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धान की रोपाई से पहले कृषि विभाग ने जून में करीब चौदह सौ क्विंटल सब्सिडी वाले धान का बीज मंगवाया था। किसानों को यह बीज 800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दिया जाना है। बाद में उसकी सौ फीसदी सब्सिडी किसानों के खाते में ट्रांसफर होनी थी। बताते हैं कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने जान बूझकर पंत-24 और पीआर 121 प्रजाति का मोटा धान बीज मंगवाया, जिसकी जिले में मांग न के बराबर है। इसी कारण किसानों ने इस बीज की खरीद नहीं की। इससे यह बीज राजकीय कृषि बीज भंडार केंद्रों पर पड़ा रहा। किसानों की यह भी शिकायत थी कि बीज घुना हुआ है।
आलमपुर जाफराबाद के ब्लॉक प्रमुख आदेश यादव सहित कई लोगों ने यह शिकायत की कि इस बीज की बिक्री न होने पर दबाव बनाकर इसे खाद-बीज बिक्री वाले दुकानदारों के यहां पहुंचा दिया गया है, जबकि रजिस्टर पर विभाग से मिलीभगत रखने वाले किसानों के फर्जी नाम चढ़ाकर लाखों रुपये की सब्सिडी को हड़पने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में ऊंचे रेट पर पतला धान का बीज दुकानों से खरीदना पड़ा है।
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किसानों के खाते में नहीं पहुंची सब्सिडी की रकम
कृषि विभाग के अफसरों की मानें कि यह बीज किसानों को ही आवंटित किया गया, लेकिन अब तक किसानों के खाते में सब्सिडी की धनराशि नहीं पहुंची है। इसके लिए डीडी कृषि डॉ. अशोक यादव का कहना है कि शासन से पोर्टल बंद होने के कारण किसानों के खातों और बिक्री का रिकार्ड दर्ज होने में देरी हुई है। अब सारी तैयारी पूरी है। शीघ्र ही खातों में धनराशि स्थानांतरित कर दी जाएगी।
धान बीज की बिक्री में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। फिर भी शिकायत आई है कि तो इसकी चेकिंग करा ली जाएगी कि रजिस्टर में जो नाम दर्ज है, उन्हीं किसानों को बीज बेचा गया है, अन्य किसी को नहीं।
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- डॉ. अशोक यादव, डीडी कृषि
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