बरेली। कर्ज माफी के लिए करीब 17.5 हजार किसान परेशान घूम रहे हैं। ये फार्म जनवरी से जमा हैं। कृषि विभाग के अधिकारी पहले चुनाव की तैयारी में व्यस्तता बताते हुए किसानों को लौटाते रहे थे और अब सत्यापन के लिए तहसीलों में फार्म फंसे होने की बात कही जा रही है, जबकि किसानों का दर्द यह है कि बैंक वाले उन पर बकाया जमा करने का दबाव बना रहे हैं। वह किसी तरह बंदोबस्त करके पैसा जमा भी कर दें तो बाद में कहीं कर्ज माफी में अड़ंगा न पैदा हो जाए।
मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना में दो हेक्टेयर की खेती वाले किसानों का 31 मार्च 2016 से पूर्व के बकाया में एक लाख रुपये तक कर्ज माफ होना है। लक्ष्य में बढ़ोतरी के बाद कृषि विभाग के दफ्तर में जनवरी में 17500 किसानों के फार्म जमा किए थे। किसानों का कहना है कि वह जनवरी से चक्कर काट रहे हैं। पहले स्टाफ यह बताता रहा कि चुनाव में व्यस्तता की वजह से कोई काम नहीं हो रहा है। बाद में आचार संहिता में पूरा काम ठप कर दिया गया, जबकि मई में आचार संहिता हटने के बाद से अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों के सभी फार्म संबंधित तहसीलों में भेजे जा चुके हैं।
तमाम किसानों ने दर्ज कराई शिकायतें
मीरगंज के बहादुरनगर के कल्लूराम पुत्र नत्थूलाल का कहना है कि उन्होंने 50 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया था। जनवरी में आवेदन जमा किया था, लेकिन अब तक खाते में कर्ज माफी की रकम नहीं पहुंची है। सुखली गांव के रहने वाले राम बहादुर का कहना है कि उन्होंने दिसंबर 2015 में 1.55 लाख रुपये का ऋण लिया था। खेती में इतनी पैदावार नहीं हो सकी कि कर्ज चुकता कर सकें, जबकि ऋण मोचन योजना में भी उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिली है।
ऋण मोचन स्कीम के फार्म तहसीलों में भेजे जा चुके हैं। इनका सत्यापन चल रहा है। जल्द ही पात्र किसानों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।
-धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला कृषि अधिकारी