लॉकडाउन से मिली छूट का हो रहा दुरुपयोग, प्रधान और अफसरों की चल रही मनमानी
बरेली। लॉकडाउन में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों में सुरक्षा मानक की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यही कारण है कि 891 ग्राम पंचायतों में शुरू कराए गए मनरेगा कार्यों में मजदूरों में संक्रमण की आशंका जताई जाने लगी है। यहां बता दें कि हाथ धोने के लिए साबुन, मुंह ढंकने के लिए मास्क समेत कार्य कराने के लिए दो गज सामाजिक दूरी का अनुपालन कराने के निर्देश हैं, जो कहीं नजर नहीं आ रहे।
जिले की 1193 ग्राम पंचायतों में से 891 में मनरेगा के तहत काम कराए जा रहे हैं। इनमें करीब 375 गांवों में रहने वाले ज्यादातर युवा बाहरी राज्यों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। इसमें से कई लॉकडाउन के बाद घर पहुंचे। गांवों में पहले से ही मजदूरों की काफी संख्या है, ऐसे में सरकार ने उन्हें राहत देते हुए मनरेगा के तहत काम देने के निर्देश दिए। बताया जाता है कि मनरेगा से कराए जाने वाले काम में मिली छूट का कुछ प्रधान फायदा उठा रहे हैं। गांव में उन परियोजनाओं का काम शुरू करवा दिया गया है, जिनका ब्लॉक स्तर से एस्टीमेट तक स्वीकृत नहीं।
फतेहगंज पश्चिमी, नवाबगंज, आंवला ब्लॉक में करीब 42 हजार मनरेगा श्रमिक पंजीकृत हैं। ज्यादातर गांवों में मनरेगा से सड़क, खड़ंजा डलवाने आदि का काम कराने के नाम पर रस्मअदायगी की जा रही है। आलमपुर जाफराबाद के एक भूखंड के समतलीकरण का काम स्वीकृत है, एस्टीमेट के तहत 30 श्रमिक मनरेगा से लगाए जाने थे। बावजूद इस गांव में चार परियोजनाओं पर काम कराया जा रहा है। इस मामले में मनरेगा डीसी गंगाराम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।