डॉक्टर और दवा विक्रेताओं के कॉकस को तोड़ना अभी थोड़ा मुश्किल ही लगता है, हालांकि कुछ डॉक्टरों ने पहल करते हुए ब्रांडेड (एथिकल) दवाओं के नाम के स्थान पर सॉल्ट लिखना शुरू कर दिया है, जिससे कालीबाड़ी में खुला प्रधानमंत्री जन औषधि केेंद्र दौड़ पड़ा है। हालांकि ब्रांडेड दवाओं के पर्चे भी पहुंच रहे हैं, जिन्हें केंद्र पर बैठे फार्मेसिस्ट इंटरनेट के जरिए उस दवा का जेनेरिक सॉल्ट मरीज को उपलब्ध करा रहे हैं। दवाएं सस्ती मिलने से मरीजों को काफी राहत मिली है।
सात अप्रैल को कालीबाड़ी में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की शुरुआत की गई थी। केंद्र के मालिक विवेक अग्रवाल ने बताया कि आसपास के डॉक्टर भी दवाआें के सॉल्ट नहीं लिखते हैं, इससे ग्राहक दवा नहीं खरीद पाता है। जिस दिन दुकान खुली थी उसके अगले दिन ही इतनी अच्छी बिक्री हुई थी कि तीन से चार गत्ते दवाआें के खाली हो गए थे, लेकिन इधर कुछ सेल घटी है।
विवेक ने बताया कि उनके यहां फार्मेसिस्ट तैनात है, जो दवा का नाम बताने पर इंटरनेट से सॉल्ट खोजती हैं और जेनेरिक दवा देती हैं। सॉल्ट भी दवा कंपनी की साइट पर जाकर देखते हैं ताकि किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो।
कुछ दवाओं का है टोटा
विवेक अग्रवाल ने बताया कि करीब 800 दवाआें की सूची उनको केंद्र सरकार की ओर से दी गई है। इनकी सप्लाई बीपीपीआई कंपनी की ओर से की जा रही है, जो लखनऊ में है, लेकिन इनमें से 80 फीसदी दवाएं उपलब्ध हैं, बताया जा रहा है कि एक से दो महीने में बाकी दवाएं आ जाएंगी।