बरेली। नई वाहन स्क्रैप नीति लागू हुए दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जिले में अब तक स्क्रैप सेंटर नहीं खुल सका है। एक स्क्रैप सेंटर बहेड़ी में खोलने के लिए निजी फर्म ने आवेदन किया था। स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने के बाद अधिकारियों ने स्वीकृति के लिए फाइल परिवहन मुख्यालय भेजी है, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। स्थिति ये है कि जिले में 70 हजार से ज्यादा ऐसे वाहन हैं जो 20 वर्ष पूरे कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
जिले में कुल 9,03,814 वाहन हैं। इनमें 3,79,690 ऐसे वाहन हैं जिनका पंजीकरण 2019 से पहले हुआ था। इन वाहनों में 70,457 ऐसे वाहन हैं जो 15 और 20 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं और स्क्रैप की श्रेणी में आ गए हैं। इसके अलावा 15 वर्ष पूरे कर चुके तीन हजार से ज्यादा वाहनों का हाल के महीनों में अगले पांच साल के लिए री-रजिस्ट्रेशन कराया गया है।
नई स्क्रैप नीति के तहत अगर कोई वाहन स्वामी वाहन के 15 या 20 साल पूरे होने पर उसे स्क्रैप कराता है तो उसे वाहन के पंजीकरण और वन टाइम टैक्स पर 15 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। इसके लिए वाहन स्वामी को वाहन स्क्रैप कराने के बाद स्क्रैप सेंटर से मिलने वाले प्रमाण पत्र को नए वाहन के रजिस्ट्रेशन के साथ देना होता है। जिले में कोई स्क्रैप सेंटर न होने के कारण अब तक एक भी वाहन स्वामी को पंजीकरण और वन टाइम टैक्स में छूट नहीं मिली है। 260 से ज्यादा सरकारी वाहन भी कार्यालयों में खड़े स्क्रैप के इंतजार में कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
एक जून से बदलेगा नियम, 20 साल से अधिक पुराने वाहनों पर जुर्माना
एक तरफ तो अभी स्क्रैप सेंटर नहीं खुला और दूसरी ओर एक जून से पुराने वाहनों के संचालन को लेकर नियम बदलने जा रहा है। नए नियम में अगर कोई वाहन 20 साल से ज्यादा पुराना सड़क पर चलता हुआ पाया जाएगा तो उसे पकड़कर सीधे स्क्रैप सेंटर भेजने के साथ ही वाहन स्वामी पर जुर्माना भी लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा नए वाहन के पंजीकरण में उसे कोई छूट भी नहीं देने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना स्क्रैप सेंटर खोले पुराने वाहनों पर सख्ती क्यों की जाएगी?
15 साल पुराने वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन को फिटनेस जरूरी
15 साल पुराने हो चुके निजी वाहनों को अगले पांच साल तक री-रजिस्ट्रेशन कर चलाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वाहन की फिटनेस जरूरी होती है। ऐसे में वाहन को अगर फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं मिलता तो री-रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो सकता। यानी ऐसे पुराने वाहनों को स्क्रैप सेंटर भेजने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं होता। चूंकि यहां स्क्रैप सेंटर नहीं है, ऐसे में मजबूरन वाहन स्वामी को परेशान होना पड़ता है।
वर्जन
स्क्रैप नीति को लेकर एक जून से नियमों में बदलाव हो जाएगा। स्क्रैप सेंटर खोलने के लिए बहेड़ी की निजी फर्म ने आवेदन किया था। स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर इसे स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया गया है। 15 या 20 साल पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर वाहन स्वामी को नए वाहन के रजिस्ट्रेशन में 15 फीसदी तक छूट का प्रावधान भी है। अब तक जिले में किसी ने इस छूट का लाभ नहीं लिया है। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन/नोडल अधिकारी