बरेली। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) में सोमवार से चिकन जेनेटिक संसाधनों के संरक्षण के लिए पीजीसी बायोबैंकिंग, सरोगेट टेक्नोलॉजी पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। यहां प्रतिभागियों को पृथक्करण, संवर्धन, क्रायोप्रिजर्वेशन, जीनोमिक एकीकरण सिखाया जाएगा।
कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली, इंटरनेशनल लाइवस्टॉक रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएलआरआई) इथियोपिया, सेंटर फॉर ट्रॉपिकल लाइवस्टॉक जेनेटिक्स एंड हेल्थ (सीटीएलजीएच) यूके के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई। सीएआरआई डायरेक्टर डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रिमॉर्डियल जर्म सेल्स (पीजीसीएस) की बायोबैंकिंग, सरोगेट तकनीक, पृथक्करण, संवर्धन, क्रायोप्रिजर्वेशन, जीनोमिक एकीकरण जैसी उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को प्रचार-प्रसार का सुझाव दिया।
आईएलआरआई प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ओलिवियर ई. हनोटे ने विषय संबंधी और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सिम्मी तोमर ने कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया। मुख्य अतिथि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने अनुसंधान, तकनीकी नवाचार से स्वदेशी चिकन नस्ल संरक्षण पर जोर दिया। कहा कि कार्यशाला से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों के लिए साझा मंच मिलेगा। आईएलआरआई कंट्री रिप्रेजेंटेटिव डॉ. राम डेका ने अंतरराष्ट्रीय महत्व पर जोर दिया, ताकि कुक्कुट पालक लाभान्वित हो सकें। ब्यूरो