बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के फैसले के बाद मदरसों में खलबली मची हुई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असंवैधानिक करार दिया है। इस पर उलमा का कहना है कि मदरसों में सिर्फ मजहबी शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, हिंदी की भी पढ़ाई होती है। जिले में 136 विद्यालय ऐसे हैं जहां मानदेय न मिलने के कारण 366 शिक्षक मदरसे नहीं आ रहे। इससे कंप्यूटर, अंग्रेजी, विज्ञान आदि की पढ़ाई नहीं हो पा रही।
जिले में कुल 427 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से मौजूदा समय में 358 मदरसों में पढ़ाई हो रही है। इनमें 90 मदरसे हाईस्कूल यानी आलिया तक के हैं। बाकी एक से पांचवीं कक्षा तक चलते हैं। इसके अलावा 130 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं। वर्ष 2010 में 136 मदरसों को आधुनिक पढ़ाई के लिए चयनित किया गया था। इनमें कंप्यूटर, विज्ञान, अंग्रेेजी, गणित आदि विषयों को पढ़ाने के लिए मानदेय पर 366 शिक्षक रखे गए थे। मानदेय के लिए केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से बजट दिया जाता था, लेकिन केंद्र सरकार ने 2016-17 से बजट में अपना अंश देना बंद कर दिया। राज्य सरकार ने भी मई 2023 से बजट पर रोक लगा दी है। मानदेय न मिलने पर आधुनिक विषय पढ़ाने वाले 366 शिक्षकों ने भी मदरसा जाना बंद कर दिया है। इसके बाद इन मदरसों में ये आधुनिक विषय की पढ़ाई भी बंद हो गई।
केंद्र सरकार की तरफ से मदरसों में आधुनिक पढ़ाई के लिए शिक्षकों को मिलने वाला बजट 2016-17 से नहीं आ रहा था। राज्य सरकार ने भी बीते साल बजट पर रोक लगा दी। इससे आधुनिक विषयों की पढ़ाई करने के लिए मदरसों पर रखे गए शिक्षक नहीं आ रहे। - अंजना सिरोही, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।