बरेली। साठा धान पर्यावरण पर विपरित असर डाल रहा है। ऐसे में साठा धान को बरेली में प्रतिबंधित कर दिया गया है। कहा कि कोई भी किसान इस धान की रोपाई न करें। क्योंकि यह धान पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अनुकूल नहीं है। उसकी जगह पर कम पानी और कम लागत वाली फसलों को करने के लिए प्रेरित किया।
उपकृषि निदेशक अभिनंदन सिंह ने कहा कि खेतों में साठा धान की रोपाई न करें। यह पर्यावरणीय दृश्टिकोण से अनुकूल नहीं है। क्योंकि धान की फसल ज्यादा पानी लेती है। खासतौर पर गर्मी के सीजन में होने वाली धान की फसल को लगभग तीन से चार दिन में पानी की जरूरत होती है। अगर समय पर पानी नहीं लगाया तो धान की फसल सूख जाएंगी। उपकृषि निदेशक ने कहा कि साठा धान लगाने से भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है। इससे कीट रोग लगने की संभावना बन रहती है। ऐसे में इसके स्थान पर जायद की फसल करें। जिसमें तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी के अलावा ग्रीष्मकालीन सब्जियों के साथ उर्द, मूंग, मक्का की खेती करने से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। संवाद