बरेली। बिजली की हाईटेंशन लाइन और पोल शिफ्टिंग किए बगैर सेटेलाइट फ्लाईओवर का काम आगे बढ़ने के साथ ही खतरा बढ़ गया है। चौराहे पर हाईटेंशन लाइन के नीचे ही पिलर बनाया जा रहा है। उसके पास ही लोहे का बड़ा कियोस्क बोर्ड लगा हुआ है। इससे कभी भी करंट उतर सकता है। इससे साइट पर काम कर रहे श्रमिक व सेतु निगम के स्टाफ के साथ चौराहे के पास से गुजरने वाले राहगीरों पर हादसे का खतरा मंडरा रहा है। पावर कारपोरेशन को हाईटेंशन लाइन को ऊंचा करने सहित कई कामों के लिए सेतु निगम को करीब चार करोड़ रुपये जमा करने बाकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि शासन से बजट पास न होने से इसका भुगतान नहीं हो पा रहा।
सेटेलाइट फ्लाईओवर का काम शुरू करने के लिए सेतु निगम को जनवरी-फरवरी में ही सेटेलाइट चौराहे के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन और ईसाईयों की पुलिया की तरफ सड़क के बीचोंबीच लगे बिजली के पोल हटवाने थे। पावर कारपोरेशन की टीम ने शुरूआत में सर्वे भी किया, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया। फ्लाईओवर का काम शुरू हो गया, लेकिन अब तक बिजली लाइन और पोल नहीं हटाए गए हैं, जबकि कैंट की साइड में पांच पिलर बनाने के साथ अब चौराहे पर भी निर्माण शुरू हो गया है। इसके ठीक ऊपर हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। उसके पास ही लोहे का कियोस्क बोर्ड लगा है। सेटेलाइट से चर्च की तरफ सड़क के बीच खंभे भी अभी लगे हैं। इसमें आए दिन वाहन टकरा रहे हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि चौराहे पर हाईटेंशन लाइन को दोगुना ऊंचा करना है, ताकि उसके नीचे आसानी से फ्लाईओवर बन सके। इसके लिए सेतु निगम को पावर कारपोरेशन को चार करोड़ देने हैं, जबकि शासन से यह बजट स्वीकृत न होेने की बात कहते हुए अधिकारी हाथ पर हाथ धरे हैं।
सर्विस लेन को भी बदहाल छोड़ा गया
सेतु निगम ने सेटेलाइट चौराहे पर अब तक सर्विस लेन तक ठीक नहीं की है। करीब तीन माह पहले सर्विस लेन का बजरी और मिट्टी से पटान किया गया, लेकिन कोलतार अब तक नहीं बिछाया गया है। इससे यहां धूल उड़ती रहती है। बारिश में कीचड़ से वाहनों के रपटने की आशंका बनी रहती है।
सेटेलाइट चौराहे से हाईटेंशन लाइन के लिए शासन से चार करोड़ रुपये मांगे गए हैं। उम्मीद है कि यह रकम जल्द ही स्वीकृत हो जाएगी। इसके लिए एक बार शासन को लिखा जाएगा।
-वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम