बरेली। मोहर्रम को लेकर अदबो एहतराम के साथ अजादारी का सिलसिला शुरू हो गया है। शहीदाने कर्बला एवं नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन की याद में पहले रोज जुलूसो अलम और तख्तो ताजिये निकाले गए। शिया हल्के में सफे अजा बिछा दी गई हैं और दिन भर मजलिसो मातम का दौर चला और रात को जुलूस निकाले गए। सुन्नी हल्के में भी तखत का जुलूस निकला गया और नियाज नजर व लंगर शुरू हो गया है।
माहे मोहर्रम की रविवार को पहली तारीख पर शिया इमामबाड़ों में सुबह से ही मजलिसो मातम का सिलसिला शुरू हो गया। इसमें सभी जगह कर्बला के वाकयात बयान किए गए। पहली मजलिस गढैया के इमामबाड़ा मुहम्मद शाह में सुबह 8 बजे शुरू हुई। इसमें मुंबई से आए मौलाना नजफ मौलाई ने खिताब करते हुए इमाम हुसैन के पैगाम इंसानियत को आम किया। साथ ही 72 साथियों के साथ कर्बला की जंग का भी वर्णन किया। इसके बाद इमामबाड़ा आगा साहब, इमामबाड़ा वसी हैदर, इमामबाड़ा छिद्दी मोहम्मद हुसैन, छीपी टोला आदि में दिन भर मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। रात में काला इमामबाड़ा में अमरोहा से आए मौलाना डा. शहवार हुसैन नकवी ने मजलिस को खिताब किया। इसके बाद यहां से जुलूस भी बरामद किया गया।
शियाओं ने निकाला जुलूस-ए-अलम
बरेली। अजादारी के सिलसिले में रात को लीची बाग से जुलूस-ए-अलम निकाला गया। जुलूस से पहले मजलिस हुई। जिसे मौलाना फाजिल रजा ने खिताब किया।
अंजुमन परचमे अब्बास की ओर से यह जुलूस जावेद जैदी के इमामबाड़े से शुरू हुआ और आस पास के इलाकों में गश्त करते हुए जुलूस परवेज नकवी के निवास पर पहुंच कर संपन्न हुआ। इस बीच मरहूम रियासत हुसैन काजमी के निवास पर रुक कर नौहाख्वानी की गई। इसी तरह जुलूस के समापन पर अंजुमन गुलदस्ते हैदरी, आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी, अंजुमन शमशीरे हैदरी, परचमे अब्बास और कारवाने हुसैन ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। इस दौरान शाहनवाज हुसैन काजमी, जफर अब्बास रिजवी, आमिर जैदी, परवेज नकवी आदि शामिल रहे। इससे पहले काला इमामबाड़ा से भी मजलिस के बाद आल इंडिया अंजुमन गुलदस्ते हैदरी ने जुलूस निकाला जो दीवानखाना पहुंच कर संपन्न हुआ। जुलूस में महमूद हसन नकवी, शकील हैदर, अली हाशिम जैदी, इलियास हुसैन रिजवी, नाजिम हुसैन रिजवी, सैयद अली जमाल जैदी थे।
जरीदों का जुलूस आज
बरेली। माहे मोहर्रम की दो तारीख सोमवार को किला सब्जी मंडी के इमामबाड़ा नवाब साहब की कोठी से जरीदों जुलूस दोपहर में निकाला जाएगा।