जमीन को लेकर दुविधा
बुधवार को मेट्रो के फेज-एक के रूट का टीम ने सर्वे किया था। इसके अलावा टीम ने मेट्रो यार्ड के लिए जगह को भी तलाशा है। इसमें दो जगहों पर मुहर तो लगी है, लेकिन इनमें से एक ही जगह पर यार्ड बनाया जाएगा। सर्वे टीम ने आईवीआरआई और रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जमीन को मेट्रो यार्ड बनाने के लिए चुना है। अधिकारियों के अनुसार 80 फीसदी संभावना रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जमीन पर यार्ड बनने की है। वजह यह है कि विवि की जमीन राज्य सरकार के अंतर्गत आती है, वहीं आईवीआरआई केंद्र सरकार के अधीन है। इस कारण से ही उसकी संभावना कम हैं।
ये रूट है प्रस्तावित
मेट्रो संचालन की रूपरेखा के लिए डीपीआर को तैयार किया जाएगा। इसमें 12 किमी. जंक्शन वाया चौकी चौराहा वाया सेटेलाइट बस स्टैंड, बैरियर दो तिराहा तक का रूट शामिल है। इसके अलावा दूसरा चौकी चौराहा वाया कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, आदिनाथ चौक से बैरियर दो तिराहा से एयरपोर्ट तक 9.50 किमी. का दायरा शामिल है। इसमें बीच में कई जगह खंभे, ओवरब्रिज, सड़क, स्कूल आदि भी आ रहे हैं। खंभों को हटाने, स्कूलों के ऊपर से ब्रिज निकालने या अन्य अड़चनों को दूर करने से प्रोजेक्ट का बजट बढ़ेगा। इससे बजट करीब 2 प्रतिशत बढ़ सकता है।
मेट्रो का प्रस्तावित बजट अभी पांच हजार करोड़ है। हालांकि ये बढ़-घट भी सकता है। मेट्रो कहां भूमिगत चलेगी और कहां पिलर पर संचालन होगा? इसको लेकर अभी कोई योजना नहीं बनी है। डीपीआर में इसका ब्योरा सामने आएगा।
बीडीए उपाध्यक्ष मनिकंडन ए. ने बताया कि लाइट मेट्रो किसी भी शहर में संचालित नहीं है। ऐसे में मेट्रो के संचालन का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। टीम ने सर्वे किया है। अभी अधिकारिक रूप से बजट का अनुमान लगाना मुश्किल है। अक्तूबर तक डीपीआर तैयार कर भेजने की तैयारी चल रही है। बाकी फैसला शासन स्तर का ही होगा।