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सरोज का सुहाग तो बचा लिया..अपना नहीं बचा सकी सायरा

Sun, 08 Oct 2017 01:57 AM IST
बरेली।
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सराोज
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कहते हैं कि होनी को कोई नहीं टाल सकता है। लाख जतन कर लो, होनी होकर ही रहती है। कुछ ऐसा ही हुआ अमरोहा के कस्बा हसनपुर की सायरा के साथ। सायरा ने अपने पति असलम की जान बचाने के लिए पीलीभीत रोड के मुड़िया अहमद नगर की सरोज देवी के पति 55 वर्षीय लाल करन को अपनी किडनी दान कर दी। बदले में अपने पति 66 वर्षीय असलम को जान बचानेे के लिए सरोज की किडनी ली। मेरठ के एक ही अस्पताल में चारों आपरेशन होने के बाद सरोज की किडनी का असलम के शरीर में प्रत्यारोपण कर दिया गया। सायरा बानो की किडनी लाल करन के शरीर में प्रत्यारोपित की गई। सायरा की किडनी तो लाल करन के शरीर में काम करने लगी और उनकी जान बच गई, लेकिन आपरेशन के बाद असलम की जान नहीं बच पाई। 
मुड़िया अहमद नगर निवासी बिजली विभाग में हरदोई में तैनात अवर अभियंता लाल करन और अमरोहा के हसनपुर कस्बे के रहने वाले असलम की किडनी खराब हो गई थी। असलम लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारी करते थे। मेरठ के आनंद हॉस्पीटल में इलाज के दौरान मुलाकात होने पर असलम की पत्नी सायरा और लाल करन की पत्नी सरोज देवी ने एक-दूसरे के पति की जान बचाने के लिए अपनी किडनी देने का फैसला कर अनूूठी मिसाल कायम की। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद 21 सितंबर को चारों का आपरेशन हुआ। इसके बाद लाल करन और असलम के शरीर में किडनी प्रत्यारोपित कर दी गई। आपरेशन के बाद सब कुछ सही था। सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर असलम को डॉक्टरों ने फिर से अस्पताल में भर्ती कर लिया लेकिन मंगलवार को उनकी मौत हो गई। असलम की मौत से उनके परिवार में मातम छा गया। लाल करन का परिवार भी असलम की मौत से सदमे में हैं। लाल करन का कहना है कि असलम और सायरा से हमारा अटूट रिश्ता हो गया है। ईश्वर ने किस्मत से मिलाया था। असलम की मौत का उन्हें बेहद अफसोस है। 
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बेटी के साथ रहेंगी सायरा
सायरा का कहना है कि मैंने पति असलम की जान बचाने के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। इसके बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई। लाल करन मेरे भाई जैसे हैं। खुदा उन्हें लंबी उम्र दे। उनके परिवार में खुशियां कायम रहें, यही दुआ है मेरी। उनका कहना था कि पति की मौत के बाद अब बेटी सदफ और दामाद असद ही उनका सहारा हैं। अब उन्हीं के साथ रहकर बाकी जिंदगी गुजारेंगी। 
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असलम की मौत का हमेशा अफसोस रहेगा
लाल करन की पत्नी सरोज का कहना है कि असलम उनके भाई जैसे थे। आपरेशन के बाद हम चारों ही बिल्कुल ठीक थे। सोमवार को अचानक असलम की तबीयत खराब हुई और मंगलवार को उनकी मौत हो गई। असलम को उन्होंने अपने शरीर का अंग दिया था, उन्हें कै से भुला पाएंगी। असमल की मौत की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा है। उनकी मौत का हमेशा अफसोस रहेगा। 
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