आईएमए ब्लड बैंक की ओर से नैट जांच के बाद उपलब्ध कराए जा रहे सुरक्षित खून की विशेषता बताने के लिए प्रेसवार्ता की गई। इसमें शामिल ब्लड बैंक के चेयरमैन डॉ. अजय भारती ने कहा कि आईएमए नैट जांच से सबसे सुरक्षित ब्लड मरीजों को मुहैया करा रहा है, जबकि शहर के अन्य ब्लड बैंकाें में यह सुविधा नहीं है। इससे जांचा गया खून काफी किफायती दाम पर यहां उपलब्ध है, जबकि अन्य शहरों में इसकी कीमत दो हजार से अधिक है।
प्रेसवार्ता में आईएमए ब्लड बैंक के पूर्व चेयरमैन डॉ. अजीत साहनी ने बताया कि नैट खून में मौजूद ऐसे वायरस के एंटीबॉडी की जांच करता है जो एलाइजा मशीन से छूट जाती है। आईएमए ब्लड बैंक निदेशक डॉ. अंजू उप्पल ने बताया कि एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी खतरनाक बीमारियों को नैट टेस्ट से पकड़ना काफी आसान हो जाता है, क्याेंकि इनके वायरस को पकड़ने की अवधि एलाइजा में 20 से 82 दिन बाद है जबकि नैट में यह 6 से 15 दिन में ही पकड़ में आ जाते हैं। आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी ने बताया कि शहर के अन्य ब्लड बैंकाें को भी नैट सुविधा लेने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी कहीं से कोई जवाब नहीं मिला है।
350 मरीज मुसीबत में पड़ने से बचे
निदेशक डॉ. अंजू उप्पल और एमओ डॉ. जेपी सेठी ने बताया कि एक साल में 40 हजार 701 ब्लड सैंपल की जांच नैट मशीन से की गई है। एलाइजा जांच से बचकर निकले सैंपल नैट मशीन की जांच में पकड़े गए। 115 ऐसे सैंपल पाए गए हैं, जिनमें एचआईवी और हेपेटाइटिस पाया गया है। इनको नष्ट कराया गया है। अगर यह प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और खून के माध्यम से मरीजाें को चढ़ता तो करीब 350 लोग प्रभावित होते।