नारी निकेतन से सटे सीआई पार्क में मचा हंगामा, दो घंटे बाद उतार पाई पुलिस
बरेली। नारी निकेतन में हो रही दिक्कतों पर भड़की उत्तराखंड की संवासिनी ने मंगलवार की सुबह यहां से भागने के लिए जान की बाजी लगा दी। नारी निकेतन में लगे एक पेड़ पर चढ़कर दीवार के पार सीआई पार्क में खड़े पेड़ पर कूद गई और वहां से उतरकर भागने की कोशिश की। स्टाफ की सूचना पर पुलिस ने उसकी घेराबंदी की। रोती-चीखती संवासिनी को घर भेजने का भरोसा दिलाकर दो घंटे की मशक्कत के बाद नगर निगम की हाइड्रोलिक लिफ्ट के जरिये पेड़ से उतारा गया।
सुबह करीब साढ़े आठ बजे नारी निकेतन में संवासिनियों को लाइन में लगाकर नाश्ता दिया जा रहा था। इसी दौरान उत्तराखंड की एक संवासिनी दौड़कर एक पेड़ पर चढ़ गई। ऊपर तक पहुंचने के बाद वह दीवार के उस पार सीआई पार्क में खड़े दूसरे पेड़ पर पहुंच गई और वहां से उतरकर भागने की कोशिश करने लगी। दूसरी संवासिनियों और स्टाफ ने उसे भागते देखने के बाद शोर मचा दिया। इस पर हड़बड़ाया नारी निकेतन का स्टाफ सीआई पार्क की ओर दौड़ा। सूचना दी गई तो थाना बारादरी और प्रेमनगर की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। नारी निकेतन की अधीक्षिका छाया ने पुलिस की मदद से उसे पेड़ से उतारने की काफी कोशिश की पर वह नहीं उतरी। वह कभी रोती तो कभी चीखने लगती। पुलिस के पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की तो वह कूद जाने की धमकी देने लगी।
इसी बीच पुलिस ने नगर निगम की हाइड्रोलिक लिफ्ट मंगा ली। फायरमैन हिमांशु और बारादरी थाने की कांस्टेबल रेखा लिफ्ट पर चढ़कर संवासिनी के नजदीक पहुंचे। दोनों को ऊपर आते देख संवासिनी ने शोर मचाते हुए फिर कूद जाने की धमकी देनी शुरू कर दी। दोनों ने उससे कहा कि उसे नारी निकेतन लेकर नहीं जाएंगे बल्कि उसके घर भिजवा देंगे। इस पर वह पेड़ से उतरने के लिए राजी हो गई। पुलिस ने लिफ्ट के जरिये उसे नीचे उतारकर नारी निकेतन स्टाफ के हवाले कर दिया। इस पर वह फिर चिल्लाने लगी कि उसके साथ धोखा हुआ है।
‘महिला शरणालय में मानसिक मंदित संवासिनी के पेड़ पर चढ़ने की घटना को लेकर अधीक्षिका से स्प्ष्टीकरण मांगा गया है। पूछा गया है कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कौन तैनात था। हालांकि संवासिनी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। वह घर का पता भी ठीक तरह से नहीं बता पा रही। केवल इतना पता चला है कि वह पिथौरागढ़ में कहीं रहती है। लॉकडाउन के बाद उसे उसके घर भिजवाने की कोशिश की जाएगी।’ -नीता अहिरवार, जिला प्रोबेशन अधिकारी
दिन-दिन भर भूखा रहना पड़ता है.. कोई देखने वाला नहीं
पेड़ पर चढ़ी संवासिनी ने आरोप लगाया कि नारी निकेतन में न वक्त पर नाश्ता मिलता है और न खाना। कई बार पूरे दिन भूखा रहना पड़ता है। यहां वक्त गुजारना मुश्किल हो रहा है, इसीलिए तंग आकर उसने यहां से भागने की कोशिश की। आखिर तक वह फरियाद करती रही कि उसे उसके घर भेजने की व्यवस्था की जाए।
अधीक्षिका बोलीं- हम कैसे पहुंचा सकते हैं घर
नारी निकेतन की अधीक्षिका छाया का कहना है कि युवती उत्तराखंड की निवासी है। वहां उसका पति और दो बच्चे हैं। कुछ महीने पहले वह दिल्ली के एक युवक के साथ घर से चली गई थी। उसने धोखा दिया तो बरेली आ गई। यहां लावारिस हालत में घूमते देख पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया और उसे नारी निकेतन भेज दिया गया। तब से वह यहां है। उसकी इच्छा अपने घर जाने की है, लेकिन बगैर कोर्ट के आदेश के उसे कैसे भेजा जा सकता है।