मुख्यमंत्री सचिवालय सहित प्रदेश मुख्यालय के सभी विभागों की कमिश्नरी और जिला प्रशासन के पास न तो चिट्ठी आएंगी और नही उनको चिट्ठी जाएंगी। सारा का सारा काम ई : गवर्नेंस के जरिए 25 जनवरी से दो चरणों में आन लाइन होने जा रहा है। इसके लिए जनवरी के पहले सप्ताह से ट्रायल भी हो चुका है। यह सिस्टम तहसील तक रहेगा। तहसीलों में आदेशों के प्रिंट निकाले जाएंगे और उसके बाद निचले स्तर पर कार्रवाई को भेजे जाएंगे। तहसीलदार और एसडीएम की ओर से डीएम और कमिश्नर को ईमेल से ही पत्र भेजे जाएंगे। शासन ने इस व्यवस्था का नाम ‘जन सुनवाई’ रखा है।
इस सिस्टम के तहत हर स्टेप पर फरियादी के आवेदन की अधिकारी जिस तरह से ई मार्किंग करेंगे, उसकी जानकारी एसएमएस के माध्यम से उसके मोबाइल पर दी जाएगी। पहले चरण में मुख्यमंत्री कार्यालय से जिलों और शासन के प्रमुख सचिव व निदेशकों को भेजने की व्यस्था 25 जनवरी से लागू होगी। इसके बाद प्रदेश मुख्यालय के विभागध्यक्ष अपने अधीनस्थ जिलों के अधिकारियों को यह व्यवस्था 20 फरवरी से लागू करेंगे। इस सिस्टम के लागू होने से डाक पर खर्च होने वाले कई करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही ई लेटर के माध्यम से डाक तत्काल पहुंच जाएगी। वैसे एक पत्र को निचले स्तर पर पहुंचने में एक - एक महीने का समय लग जाता है।
ये होंगे आन लाइन
मुख्यमंत्री कार्यालय, कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, डीएम, एसएसपी आफिस, लोकवाणी और जन सुविधा केंद्र, तहसील दिवस, शासन के प्रमुख सचिव, सचिव, लखनऊ स्थित निदेशालय, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, नगर निगम के नगर आयुक्त, निगम संस्थानों ने प्रबंध निदेशक, विश्व विद्यालयों के कुल सचिव, , चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, तथा आयोग की ओर से भेजे जाने वाले दिशा निर्देश।