बरेली। पठानकोट में आतंकी घटना और बरेली में रह चुके आईएसआई एजेंट इजाज की गिरफ्तारी के बाद भी बरेली के अधिकारी सेना और वायुसेना की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं।वायुसेना के त्रिशूल बेस की सुरक्षा के मसले पर सोमवार को बुलाई गई बैठक में अधिकारी नहीं पहुंचे। अब 22 जनवरी को लखनऊ में पीएम के दौरे में ड्यूटी लगने और 26 जनवरी को सुरक्षा इंतजामों का तर्क देकर इस महीने के आखिर तक बैठक टाल दी गईं। कहा तो ये जा रहा कि अधिकारी अब अपनी जवाबदेही से बचने के लिए बैठक टाल रहे हैं।
पिछले पंद्रह साल से त्रिशूल की बाउंड्रीवाल के चारों ओर अवैध निर्माण होते रहे। इसमें नगर निगम, विकास प्राधिकरण और तहसील स्टाफ की सीधी जिम्मेदारी है। वायुसेना के पत्रों के जवाब नहीं दिए गए और अभ अवैध कब्जे ध्वस्त कराने के लिए बुलाई गई बैठकों में नहीं पहुंच रहे हैं।
बीडीए ने क्यों बनने दिए बिना नक्शे के मकान?
त्रिशूल के चारों ओर 100 मीटर तक पेट्रोलिंग के लिए रोड बननी है लेकिन यहां तो अवैध मकान हैं। इन अवैध निर्माणकरने वालों को बीडीए की ओर से एक भी पत्र जारी नहीं हुआ। वायु सेना ने त्रिशूल एयरबेस की स्थापना के समय ही प्रशासन, बीडीए और नगर निगम को नियमों की जानकारी दे दी गई थी। जिसमें साफ साफ कहा गया था कि बाउंड्रीवाल के 100 मीटर तक कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए।
नगर निगम कैसे कर रहा टैक्स वसूली ?
नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वायुसेना की ओर से प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध कब्जे न होने दे। यहां तो खेल ही उलटा है इस बस्ती को वैध कराने के लिए ही शायद नगर निगम ने 32 पर हाउस टैक्स भी लगा दिया ।
सदर तहसील ने भी नहीं रोके अवैध निर्माण
सेना क्षेत्र और प्रतिबंधित भूमि को संरक्षित करने की जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होती है। इसके लिए लेखपाल और नायब तहसीलदार जिम्मेदार होते हैं। उनको हर साल यह ब्योरा देना होता है कि राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में (सेना के प्रतिबंधित क्षेत्र, सेना के पड़ाव) आदि की भूमि पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन यहां भी तहसील प्रशासन इस जिम्मेदारी से बेखबर रहा।
मुख्य सचिव-डीजीपी के आदेश भी नहीं माने
साल में दो बार मई जून और दिसंबर-जनवरी के महीने में मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से डीएम और एसएसपी को आदेश होते हैं कि अवैध निर्माण और अवैध कब्जों को ध्वस्त करने का अभियान चलाएं। स्थानीय पुलिस, स्थानीय निकाय, लेखपाल की टीम के साथ मजिस्ट्रेट और सीओ मौजूद रहेंगे लेकिन इस अभियान को त्रिशूल क्षेत्र नहीं चलाया।
अब ये कह रहे हैं
‘त्रिशूल एयरबेस सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यहां अतिक्रमण हटाने का निर्णय जिला प्रशासनको लेना है। संयुक्त मीटिंग में जो भी निर्णय होगा, बीडीए उस पर तुरंत अमल कराएगा।’ डा. शशांक विक्रम, उपाध्यक्ष बीडीए
‘ये मामला संवेदनशील है। त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन से हरी झंडी मिलते ही अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटवाये जाएंगे।’ शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
‘इस समय त्रिशूल के आसपास का पूरा क्षेत्र नगर निगम की सीमा में है। 20 साल पहले इसका कुछ हिस्सा ग्रामीण इलाका था ओर तहसील में आता था। तहसील के पास तो अभिलेख हैं, उनका ब्योरा अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया है।’ खालिद अंजुम, तहसीलदार सदर