बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग में प्रतीक के रूप में कॉकरोच की आंख का स्कल्पचर बनाकर दीवार पर लगाया गया है। इसके साथ ही एक पत्थर लगाकर उसका विवरण भी दिया गया है। यह तैयारी विश्वविद्यालय में नैक दौरे को लेकर की जा रही है। इसी क्रम में सभी विभागों को व्यवस्थित कर डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं जिससे विभागों की उपलब्धियों को दिखाया जा सके।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग में 1994 में विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. भूमित्र देव ने विभाग के प्रतीक के रूप में इलाहाबाद से कॉकरोच की आंख का स्कल्पचर बनवाया था। इलाहाबाद के ही बीएस ठाकुर ने यह स्कल्पचर बनाया था। वहां से लाकर इसे दीवार में लगा तो दिया गया, लेकिन इसके विवरण का पत्थर नहीं लग पाया था। अब नैक की तैयारियों के चलते इस स्कल्पचर के पास विवरण वाले पत्थर को भी लगा दिया गया है। अनुप्रयुक्त विज्ञान संकाय के डीएन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एसएम सिंह ने बताया कि एनीमल साइंस में कॉकरोच की आंख बड़ी खास होती है। यह कंपाउंड आई होती है। उसकी आंख में किसी भी वस्तु के 13 से 15 हजार यूनिट (चित्र) बनते हैं। एक यूनिट (ओमेटीडियम - इनसेक्ट विजन) के चित्र का स्कल्पचर लगाया गया है। इसे विद्यार्थी बार-बार देखते हैं तो उन्हें चित्र याद हो जाता है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में अप्रैल में नैक का दौरा होना है। इसे लेकर तमाम विभागों में ऐसी ही खास चीजों का डिस्प्ले करने में लगा हुआ है, ताकि टीम आए तो उसे हर विभाग में कुछ न कुछ नया दिखे। विभागों में उपलब्धियां बताते हुए डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं। कुछ क्रिएटिव करने का भी प्रयास हो रहा है।