शोध कार्य संबंधी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर भी वेबसाइट पर किया गया जारी
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मिनिस्टीरियल स्टाफ सभागार में चल रही ‘प्रवेश परीक्षा एवं शोध कार्यों में सुधार’ विषय पर दो दिवसीय बैठक का शनिवार को समापन हो गया। आखिरी दिन पार्ट टाइम पीएचडी कराने, वर्ष 2019 से स्थगित पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया फिर शुरू कराने, साल में दो बार पीएचडी कराने समेत ऑनलाइन कोर्स वर्क उपलब्ध कराने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय के डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च के शोध समन्वयक प्रोफेसर सुधीर कुमार ने प्राचार्यों को शोध के संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों और सुधारों के बारे में बताया। वर्ष 2019 के बाद स्थगित पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया को मार्च के दूसरे सप्ताह में शुरू करने की जानकारी दी। बताया कि इसमें फेलोशिप वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन्हें रिसर्च के साथ पठन-पाठन में सहयोग करना होगा। उन्होंने जुलाई तक पीएचडी प्रवेश संबंधी सभी कार्य पूरे करने की जानकारी दी। बताया कि शोध छात्रों का साल में दो बार विश्वविद्यालय में प्रवेश होगा। साथ ही, पार्ट टाइम पीएचडी करवाने के साथ ही, ऑनलाइन कोर्स वर्क पर भी विश्वविद्यालय विचार कर सकता है। साथ ही, पीएचडी पूरी होने पर तीन माह के भीतर ही छात्र को अवॉर्ड कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रयासरत है। शोध समन्वयक ने कहा कि साल 2012 से अब तकलंबित शोध प्रबंधों को जल्द निस्तारित करने की योजना तैयार की जा रही है। शोध के कार्यों से संबंधित जानकारी छात्रों तक पहुंचाने के लिए फोन नंबर भी वेबसाइट पर जारी किया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने की प्रक्रिया शुरू
विश्वविद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर एसके पांडे ने बताया की रुहेलखंड विश्वविद्यालय राज्य का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित अधिसूचना जारी होने से पहले ही विश्वविद्यालय में इसका क्रियान्वयन शुरू करा दिया। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग की प्रक्रिया ऑनलाइन कराने से समय की बचत होती है। चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को लाभकारी बताया। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडे और परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय के बीच बेहतर सामंजस्य बढ़ाने पर बल दिया।
जल्द ऑनलाइन मिलेगा माइग्रेशन और डिग्री
परीक्षा नियंत्रक संजीव सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय जल्द ही माइग्रेशन और प्रॉविजनल डिग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराने की शुरुआत करने जा रहा है। इससे पूरे रुहेलखंड क्षेत्र में छात्रों को खासी राहत मिलेगी। उनकी यात्रा का समय बचेगा, खर्च बचेगा। सभी प्रधानाचार्य से छात्रों के प्रैक्टिकल के नंबर हमेशा समय पर ही उपलब्ध करवाने को कहा, ताकि छात्र और कॉलेज ही नहीं विश्वविद्यालय भी परेशानियों से बच सके। इसके बाद कुलपति ने परीक्षा एवं शोध के विषय पर प्राचार्यों से सुझाव मांगे।
सम्मान हासिल करने के लिए करें बेहतर कार्य
कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय के पास केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तुलना में न केवल कम संसाधन हैं, बल्कि यहां प्रशासनिक एवं वित्तीय संसाधनों की भी कमी है। फिर भी सम्मान हासिल करने के लिए बेहतर विकल्प तलाशने होंगे और कार्य करना होगा। उन्होंने प्राचार्यों को समय पर सभी कार्य बेहतर ढंग से करने को कहा। इसमें परीक्षा, परिणाम के लिए विश्वविद्यालय समेत महाविद्यालयों को भी समुचित प्रयास करना होगा। सभी स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों से कॉलेजों में शोध कार्य कराने के लिए निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रभारी डा.ॅ अमित सिंह, सहायक कुल सचिव सुनीता यादव, प्रशासनिक अधिकारी अनिल सिंह, प्रोग्रामर रविंद्र गौतम, प्रशासनिक अधिकारी जहीर अहमद, तपन वर्मा, देवेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।