परीक्षा समिति ने लगाई अंतिम मुहर, दो घंटे की होगी पाली, प्रश्नपत्र भी रखा जाएगा छोटा
बरेली। महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक-परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अब 27 अगस्त से होंगी। मंगलवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। कोरोना संक्रमण के चलते 18 मार्च से विश्वविद्यालय की परीक्षाओं पर रोक लगा दी गई थी। गाइडलाइन के अनुसार, पहले-दूसरे वर्ष के छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किया जाएगा। अगर कोई पहले फेल है तो उसे पास नहीं किया जाएगा।
परीक्षा नियंत्रक संजीव सिंह ने बताया कि स्नातक-परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा अवधि को तीन से घटाकर दो घंटे करने पर विचार किया गया है। तीन पालियों में परीक्षा होगी और हर पाली दो-दो घंटे की होगी। समय कम होने की वजह से प्रश्न भी कम पूछे जाएंगे। प्रश्न पत्र तीन पार्ट में होते हैं। अब तीनों पार्ट में प्रश्नों की संख्या भी कम की जाएगी। जिससे दो घंटे में छात्र उसका उत्तर लिख सकें। पहली पाली में बीए, दूसरी में बीकाम और तीसरी में बीएससी की परीक्षाएं होंगी। एक पाली की परीक्षा खत्म होते ही परीक्षा केंद्र को सैनिटाइज कराया जाएगा। 10 दिन में परीक्षाओं का शेड्यूल जारी करने की तैयारी है। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने बताया कि परीक्षा की तिथि घोषित हो गई है। सभी महाविद्यालयों को इस बारे में बता दिया गया है।
स्थानीय शिक्षकों से करा लिए जाएंगे प्रैक्टिकल
कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रैक्टिल पर भी फैसला लिया गया है। बताया गया कि बाहर से शिक्षक को बुलाने की बाध्यता नहीं रहेगी। यहीं स्थानीय शिक्षकों से ही प्रैक्टिल करा लिए जाएंगे।
17 अगस्त को फिर होगा मंथन
परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा तिथि घोषित हो गई है, लेकिन 17 अगस्त को एक बार फिर बैठक बुलाकर उस समय के मौजूदा हालात को देखते हुए इस पर मंथन होगा। माना जा रहा है कि अभी भी काफी कुछ कोरोना संक्रमण के फैलते दायरे और उस समय के मौजूदा हालातों पर निर्भर करेगा।
परीक्षा को लेकर पहले से ही विरोध
परीक्षा कराने को लेकर छात्र संगठन और शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं। रूटा महामंत्री स्वेदश सिंह, डॉ. टीएस चौहान ने कहा कि इस समय कोरोना संक्रमण के जो हालात है, उसे देखते हुए परीक्षा कराने का फैसला उचित नहीं है। यह शिक्षकों के लिए और खतरा पैदा करेगा। वहीं छात्र नेता अनूप यादव ने कहा कि छात्र संगठन पहले से ही इसका विरोध कर रहे हैं। फाइनल इयर की परीक्षाएं नहीं करानी चाहिए। यदि परीक्षार्थियों में संक्रमण फैलना शुरू हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह भी तो विश्वविद्यालय तय करे।
पहले परीक्षा फिर परिणाम
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के निहार त्यागी ने कहा कि परीक्षा कराने का फैसला एकदम सही है। यदि अंतिम वर्ष के परीक्षार्थियों की परीक्षाएं नहीं होंगी तो उन्हें प्रमोट किया जाएगा और भविष्य में नौकरी लेने या और उच्च शिक्षा लेने के दौरान उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। छात्रों का भविष्य भी इससे खराब हो सकता है। विश्वविद्यालय सभी एहतियात बरतते हुए परीक्षा कराए। हम पहले परीक्षा फिर परिणाम पर सहमति रखते हैं।