तीसरे दिन भी जुटी रही खतौनियों के मिलान में लेखपालों की टीम
बरेली। बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से अलकेमिस्ट कंपनी के हक में फैसला सुनाए जाने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। शासन की ओर से जमीन रबर फैक्टरी के नाम कैसे हुई इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा है। जिसके लिए मंडलायुक्त के निर्देश पर लेखपालों की टीम खतौनियों की जांच में दो दिन से जुटी हुई है।
अफसरों के मुताबिक फैक्टरी की जमीन में सैंकड़ों की तादाद में गाटा संख्या दर्ज हैं। जिनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कहीं कोई चूक या गलती न रहे इसलिए रिपोर्ट बारीकी से जांचने के निर्देश हैं। एक दो दिन में रिपोर्ट तैयार होने पर ही स्थिति साफ हो सकेगी।
21 साल से बंद पड़ी सिन्थेटिक एंड केमिकल्स (रबर फैक्टरी) के प्रकरण में बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से अल कैमिस्ट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के हक में फैसला सुना दिया गया है। जिसके बाद प्रशासन वर्ष 1959 में किसानों के नाम भूमि (आराजी) रबर फैक्टरी के नाम कैसे हुई यह जानने की कवायद में जुट गया है। सवाल है कि क्या सरकार ने भूमि अधिग्रहीत की थी अगर नहीं की तो मुंबई के सेठ किला चंद को भूमि लीज पर किस तरह से दी गयी। ऐसे और भी कई सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं।