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रबर फैक्टरी प्रकरणः किलाचंद क्लब के 38 कर्मचारियों का भी दो करोड़ बकाया

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रबर फैक्टरी।
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फैक्टरी के श्रमिक नेताओं ने कॉलोनी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सूची में किया शामिल
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 27 अक्तूबर कोकमिश्नर के साथ प्रस्तावित पक्षकारों की बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव, दिलाएंगे मदद

बरेली। बाईस वर्षों से बंद फतेहगंज पश्चिमी की रबर फैक्टरी के कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन अब सेठ तुलसीदास किलाचंद क्लब के कर्मचारियों ने दो करोड़ के बकाया भुगतान का दावा पेश कर पक्षकारों से गुहार लगाई है। शनिवार को फतेहगंज पश्चिमी स्थित फैक्टरी गेट पर कर्मचारियों की सभा हुई। इसमें क्लब के कर्मचारियों के दो करोड़ के बकाए का भुगतान कराने पर सहमति बनी।
सभा में एस एंड सी कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक मिश्र ने फैक्टरी में कार्यरत रहे सुपरवाइजरों और श्रमिकों के बकाया भुगतान को लेकर चल रही कार्यवाही की जानकारी दी। उन्होंने शासन से गठित विधानसभा समिति के समक्ष बकाया भुगतान की फाइल पहुंचने, पिछले दिनों पक्षकारों के साथ हुई जिला प्रशासन की बैठक और 944 कर्मचारियों के बकाया भुगतान पर सभी संगठनों के बीच सहमति बन जाने की बात कही। सेठ तुलसीदास किलाचंद क्लब के कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान का प्रस्ताव रखा, इस पर सभी ने सहमति जताई।
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अशोक मिश्र ने बताया कि 15 जुलाई, 1999 को फैक्टरी के पे-रोल पर रहे सभी कर्मचारियों का बकाया भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा कॉलोनी में काम करने वाले सेठ तुलसीदास किलाचंद क्लब के कर्मचारियों को भी वेतन जारी नहीं हुआ है। लिहाजा, उनका भी भुगतान किया जाना जरूरी है। मालियों से ऊपर ऐसे कर्मचारियों की संख्या 38 है। इनका वेतन फैक्टरी द्वारा ही दिया जा रहा था। फैक्टरी बंद होने के बाद इनके वेतन का करीब दो करोड़ रुपया बकाया है।

भुगतान के लिए जिला प्रशासन को सौंपी सूची

सेठ तुलसीदास किलाचंद क्लब में कार्यरत रहे 38 कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए जिला प्रशासन को सूची सौंप दी गई है। पक्षकारों ने कहा कि रबर फैक्टरी और कर्मचारी दोनों को ही वेतन आदि मदों में भुगतान करने वाला मालिक एक ही था। लिहाजा, उनके भी देयों का भुगतान होना ही चाहिए। आकलन के अनुसार करीब दो करोड़ रुपये का बकाया भुगतान क्लब कर्मचारियों को करना होगा।

270 करोड़ के भुगतान पर बन चुकी है सहमति

पक्षकारों के मुताबिक, 22 साल पहले फैक्टरी बंद जरूर की गई थी, लेकिन बंदी की घोषणा नहीं की गई। कर्मचारियों को सवेतन अवकाश पर भेज दिया गया था। इस कारण कंपनी पर कर्मचारियों के अब तक के वेतन आदि को मिलाकर करीब 270 करोड़ की देनदारी बनती है। पक्षकारों ने फैक्टरी के 944 कर्मचारियों के भुगतान के संबंध में सभी दस्तावेज जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दिए हैं।

27 अक्तूबर को पास होगी देनदारियों की फाइल

एडीएम (एफआर) मनोज पांडेय के मुताबिक, 27 अक्तूबर को कमिश्नर आर. रमेश कुमार 22 साल से बंद पड़ी रबर फैक्टरी के कर्मचारियों के बकाया भुगतान के संबंध में पक्षकारों के साथ बैठक करेंगे। जिला प्रशासन, श्रम विभाग भी देनदारी के संबंध में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। इस पर सभी पक्षों से बातचीत कर बकाया भुगतान के लिए फाइल पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद फाइल शासन को भुगतान के लिए भेजी जाएगी।

सेठ तुलसीदास किलाचंद क्लब में कार्यरत रहे 38 कर्मचारियों के परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनका बकाया भुगतान भी किया जाना चाहिए। बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। - अशोक मिश्र, महामंत्री एस एंड सी कर्मचारी यूनियन

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