बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिल प्राप्त किए बिना ही एक फर्म को 4.62 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। क्रीड़ा निधि की धनराशि से विवि प्रशासन ने खिलाड़ियों के बजाय अधिकारियों के लिए ब्रांडेड ट्रैक सूट खरीद डाले। अंकतालिकाओं की जांच के नाम पर भी संस्थान को खूब आर्थिक चोट पहुंचाई गई। यह खुलासा लेखा परीक्षा विभाग की ऑडिट में हुआ है। उप निदेशक आशीष वार्ष्णेय ने इसकी रिपोर्ट कुलपति को भेज दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने 25 जनवरी 2023 को व्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट को मुख्य परीक्षा के ऑनलाइन फार्म भरवाने, परीक्षा और उसके बाद परिणाम घोषित करने के एवज में 4.62 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके लिए फर्म से कोई बिल नहीं लिया गया। नोटशीट के अनुसार, मुख्य परीक्षा में 3,82,409 छात्रों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। इसमें से 3,81,814 का परिणाम घोषित किया गया था। इसके सापेक्ष 3,81,219 छात्रों का क्लेम फर्म ने किया था। इस तरह 595 छात्रों का परीक्षाफल घोषित न होने और फर्म के स्तर से क्लेम न किए जाने के संंबंध में विश्वविद्यालय ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
इधर, क्रीड़ा निधि के 11.70 लाख रुपये छात्र-छात्राओं के बजाय अधिकारियों-कर्मचारियों पर खर्च कर दिए गए। इस धनराशि से उनके लिए 400 ब्रांडेड ट्रैक सूट खरीदे गए थे। ट्रैक सूट की खरीदारी गांधी स्पोर्ट्स से की गई। प्रत्येक ट्रैक सूट की कीमत 2,925 रुपये दिखाई गई। संस्था को 28 फरवरी 2023 को चेक से भुगतान किया गया। जबकि, नियमानुसार क्रीड़ा निधि छात्रों पर ही खर्च की जानी चाहिए थी। इसी तरह अंक तालिका जांचने में 174 नियमित कर्मियों को 31.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह अनियमित है, क्योंकि अंकतालिका जांचने वाले कर्मियों को नियमित वेतन भी मिल रहा था। संवाद
आउट सोर्सिंग एजेंसी पर लुटाए 1.61 करोड़
विश्वविद्यालय में बिना सक्षम स्तर से पद सृजित कराए नई दिल्ली की आउट सोर्सिंग एजेंसी सिटी एलर्ट सिक्योरिटी को 1.61 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमोदन तक नहीं लिया गया। ऑडिट में ये भी सामने आया कि सुरक्षा कर्मियों भविष्य निधि खाते तक नहीं खुले थे। स्पष्ट है कि जब कर्मियों की भविष्य निधि में अंशदान जमा नहीं हो रहा था तो तो संस्था से इस धनराशि की वसूली की जानी चाहिए थी या भुगतान में समायोजित किया जाना चाहिए था।
बिना टेंडर के अग्रवाल टेंट हाउस को दिए 9.38 लाख
विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की व्यवस्था के लिए निविदा आमंत्रित न करके टुकड़ों में कार्य दिखाकर अग्रवाल टेंट हाउस को 9,83,351 का भुगतान कर दिया। ऑडिट टीम ने इसे अनियमित एवं आपत्तिजनक बताया है। नियमानुसार, एक लाख रुपये से अधिक के कार्य के लिए निविदा जरूरी है।