कार्यकर्ता परिवार मिलन कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत व अन्य
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उन्होंने चौथा मूल मंत्र अनुशासन को बताया। कहा कि अनुशासन के बिना कोई भी समाज या राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। राष्ट्र को एक बार फिर विश्वगुरु बनाने के लिए हमें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासित रहना चाहिए। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले सौ वर्ष में संघ का काफी विस्तार हुआ है। संघ की विचारधारा से प्रभावित होकर देश के लोग अब संगठन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने लगे हैं। अपनी मूल परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहकर प्रगति करना चाहते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयंसेवकों के आचरण से ही समाज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छवि बनती है। स्वयंसेवकों का आचरण जितना अच्छा होगा, संघ की छवि उतनी अच्छी बनेगी। स्वयंसेवकों को सप्ताह में कम से कम एक दिन स्मार्टफोन को छोड़कर परिवार और मित्र परिवारों के साथ बैठकर भोजन करने के अलावा राष्ट्र और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा अवश्य करनी चाहिए।