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Bareilly News: रोडवेज चालकों पर काम के साथ चालान का भी बोझ

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बरेली। रोडवेज चालक प्रमोद की सड़क हादसे में मौत का कारण भले ही लगातार ड्यूटी को बताया गया, पर इनकी जेब पर चालान का अतिरिक्त बोझ भी डाला जा रहा है। इनको मानसिक रूप से भी परेशान किया जा रहा है। परिवहन निगम की तरफ से चालान की रकम की वसूली चालकों से की जा रही है। इससे रुहेलखंड व बरेली डिपो के चालक तनावग्रस्त रहते हैं।
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रुहेलखंड व बरेली डिपो में 400-400 चालक होंगे। इसमें संविदा चालकों की अधिक है। सतीश यादव ने बताया कि संविदा चालकों का मानदेय करार के अनुसार 12 हजार से 18 हजार रुपये तक है। वहीं, नियमित चालकों का वेतन 50 हजार से अधिक है। चालकों को एक दिन में आठ घंटे की ड्यूटी के बाद जहां रेस्ट देना चाहिए, जबकि संविदा चालकों से 36 घंटे तक काम कराया जा रहा है। इसके अलावा चौराहों पर बसों का चालान होने पर चालकों को जुर्मना भी भरना पड़ता है।
संविदा चालक सतीश यादव ने बताया कि पहले परिवहन निगम की तरफ से यह रकम जमा की जाती थी। अब बाकायदा चालकों की लिस्ट जारी करके वसूली जाती है। औसत प्रत्येक चालक के वेतन से पांच हजार रुपये चालान के कट जाते हैं। ऐसे में एक माह की कड़ी मेहनत के बावजूद भी उनको कम वेतन मिलता है। इसके अलावा कहीं जाम लग गया तो ट्रैफिक पुलिस की तरफ से घुमाकर भेजा जाता है। इसमें दो-चार लीटर अतिरिक्त खर्च हो जाता है। ड्यूटी जमा करते समय बिल लगाने के बावजूद राहत नहीं मिलती। इसकी कटौती भी उनके मानदेय से की जाती है।
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वर्जन
बसों के जो भी चालान होते हैं, उनके गुण-दोष को देखने के बाद ही चालक के मानदेय से वसूली की जाती है। इसका आदेश मुख्यालय से है। - एके वाजपेयी, एआरएम रुहेलखंड डिपो
यात्रियों ने लिया ट्रेनों का सहारा
रोडवेज बसों के चक्काजाम के चलते यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों ने ट्रेनों का सहारा लिया। इससे बरेली जंक्शन पर भीड़ बढ़ गई। इस दौरान ऑटो वालों ने खूब कमाई कमाई की। अनुमान के मुताबिक, 10 हजार से अधिक यात्रियों ने रोडवेज बस की यात्रा छोड़कर ट्रेन की सवारी की।
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