बरेली। रिंग रोड के निर्माण के लिए किसानों की जमीन तो ले ली गई, पर अब वे मुआवजे के लिए तहसील से कलक्ट्रेट तक दौड़ लगा रहे हैं। कहीं प्रपत्र आधे-अधूरे हैं तो कहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का अड़ंगा। भूमि राशि पोर्टल भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। बैंक भी बिना किसी कारण के फाइल को ऑनलाइन रिजेक्ट कर रहे हैं। ऐसी कई बाधाओं के बीच मुआवजा अटका हुआ है।
बृहस्पतिवार को भी कई किसान विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी (एसएलएओ) के कार्यालय पहुंचे। उनकी समस्याओं को सुलझाने में कर्मचारी भी सक्षम नहीं दिख रहे थे। पता चला कि 21 गांवों के किसानों को 468 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना है। इसमें से अब तक 562 किसानों को 133 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा सका है। अभी 334.82 करोड़ रुपये मुआवजा बंटना बाकी है।
राजस्वकर्मी भी कर रहे मनमानी
किसानों ने बताया कि लखनऊ से अमाउंट लिमिट अप्रूव करने में सप्ताहभर लग जा रहा है। एक्सिस बैंक किसानों के खाता सत्यापन में 3-4 दिन ले रहा है। मुआवजे के लिए जमीन के दस्तावेज, बैंक पासबुक, आधार व पैन नंबर, अंश निर्धारण का शपथपत्र लेखपाल को देने के बावजूद रिपोर्ट एसएसलएओ कार्यालय नहीं भेजी जा रही है। इस वजह से वह भटक रहे हैं। संवाद
महीनों से लगा रहे दौड़
पिता ओमकार के नाम की जमीन का मुआवजा 24.72 लाख मिलना है। इसके लिए महीनों से दौड़ रहे हैं। सही जानकारी नहीं मिल रही है। - विनोद कुमार, सहसिया हुसैनपुर
हमें 14 बीघे का मुआवजा मिलना है। लेखपाल खोजे नहीं मिल रहे हैं। दस्तावेज कहां जमा करें। बुढ़ापे में आवागमन कठिन है, पर मजबूरी है। - धर्मपाल, महगवां उर्फ ऊंचागांव
किसान को मुआवजा भुगतान करने से पहले ऑनलाइन प्रपत्र एनएचएआई के जीएम स्तर तक अप्रूवल के लिए जाता है। इसमें समय लग रहा है। इधर, लगातार तीन पीडी भी बदल गए हैं। बैंक से भी दिक्कत आ रही है। - देश दीपक सिंह, एडीएम न्यायिक