बरेली। बरेली-सीतापुर हाईवे पर छुट्टा पशु हादसों की वजह बन रहे हैं। हर महीने औसतन दो सौ से ज्यादा छुट्टा पशु वाहनों से टकरा रहे हैं। इसमें लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। हाईवे पर न तो क्रैश बैरियर हैं, न ही छुट्टा पशुओं को रोकने के लिए कोई दूसरा उपाय किया गया है।
बरेली से सीतापुर तक हाईवे का 157 किलोमीटर हिस्सा एनएचएआई बरेली के अधीन है। मार्ग पर रोज सात-आठ हादसे छुट्टा पशुओं की वजह से हो रहे हैं। जब किसी वाहन से टकराकर पशु मर जाते हैं तो एनएचएआई उनके शव हटवाता है। पशुओं के शव हटाए जाने के आंकड़े बता रहे हैं कि प्रतिमाह 200 से अधिक हादसे छुट्टा पशुओं की वजह से हो रहे हैं।
शाहजहांपुर जिले में कटरा-जलालाबाद हाईवे पर बुधवार रात सामने अचानक छुट्टा पशु आ जाने से कार ट्रक से टकरा गई थी। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक ने हादसों का संज्ञान लिया, लेकिन सड़क सुरक्षा के उपाय अभी जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। बृहस्पतिवार को जब उनसे पूछा गया तो बोले, मुख्यालय को सड़क सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों के बारे में अवगत कराया है। अमर उजाला ब्यूरो