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फरवरी में मार्च जैसा मौसम: बढ़ते तापमान का गेहूं की फसल पर असर, किसानों के लिए एडवाइजरी जारी

Thu, 13 Feb 2025 03:44 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

इस बार फरवरी में मार्च जैसा मौसम हो रहा है। लगातार बढ़ते तापमान से अभी से ही गर्मी का एहसास होने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि बढ़ते तापमान का गेहूं की फसल पर बुरा असर पड़ सकता है। 
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खेतों में खड़ी गेहूं की फसल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली में इस बार जनवरी माह से ही तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। उसका असर रबी सीजन की फसलों पर पड़ने लगा है। इससे गेहूं के पौधों की लंबाई कम रहेगी। दाने भी हल्के और छोटे हो सकते हैं। तापमान में हुए बदलाव ने उन किसानों की चिंता अधिक बढ़ा दी है, जिन्होंने दिसंबर में बुवाई की है। अगले सप्ताह तक तापमान ऐसा ही रहा तो उत्पादन पर असर पड़ेगा।

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कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरएल सागर ने बताया कि गेहूं के लिए रात के समय ओस और दिन के समय चमकदार धूप सबसे अनुकूल मौसम होता है। लेकिन इस बार गेहूं को चमकदार धूप तो मिल रही है, लेकिन रात में ओस मिलना लगभग बंद हो गई है। गेहूं को कई चरणों में अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है। मार्च व अप्रैल में वसंत में तापमान बढ़ जाता है, लेकिन अब इस बार फरवरी में ही मार्च जैसा तापमान होने से किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं के लिए अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।

न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक पहुंचा
जनवरी और फरवरी माह में छह बार अधिकतम पारा 25 से 30 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान 14 डिग्री से नीचे नहीं हो रहा है। जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने बताया कि गेहूं को कम और स्थिर तापमान की आवश्यकता होती है। इस बार तापमान बढ़ गया। इससे गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।

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आलू को लग रहा झुलसा रोग
सरसों की फसल के लिए जिन किसानों ने समय पर उपाय नहीं किए। वह माहू का शिकार हो गए हैं। इसी तरह से आलू में भी तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने से झुलसा रोग लगने लगा है।

किसान यह करें उपाय
गेहूं की खेतों में नमी बनाए रखने के लिए 15-20 दिनों के अंतर पर सिंचाई करते रहें। तापमान की जानकारी लेते रहें। तेज हवाओं के दौरान सिंचाई न करें अन्यथा फसल गिर सकती है।

जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने बताया कि गेहूं की अधिक सिंचाई न करें। इससे फसल गिरने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 15 से 20 दिनों में एक बार ही सिंचाई करें। जिन किसानों ने देरी से फसल की बुवाई की है। उनकी फसल प्रभावित होने की संभावना है।
 
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