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रिक्शा खरीद में 70 लाख का गोलमाल

Fri, 15 Jan 2016 01:48 AM IST
बरेली
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बरेली। शहर की सफाई व्यवस्था के लिए रिक्शों की खरीद में बड़ा गोलमाल सामने आया है। स्वालेनगर की खास फर्म से ये रिक्शे 17800 रुपये में खरीदे गए हैं जबकि बाजार में इनकी कीमत दस हजार से भी कम है। ऐसे करीब 250 रिक्शों की खरीद हुई है। कमीशन के चक्कर में अधिक कीमत पर इन रिक्शों की खरीद हुई है। यही नहीं रिक्शों की खरीद में पहले भी घोटाले हुए। तमाम रिक्शे बिना इस्तेमाल के ही खराब होकर स्टोर में सड़ रहे हैं। मेयर डा. आईएस तोमर ने जांच के आदेश दिए हैं।
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दो अक्टूबर 2015 को नगर निगम ने शहर में चार जोन के 18 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा योजना प्रारंभ की थी। घर-घर से कूड़ा उठाने के टेंडर चार एजेंसियों एसएस कांस्ट्रक्शन, भाटी गीता जनकल्याण शिक्षा समिति, आनंद साहू और आसिफ खान को मिले। टेंडर की शर्तों के अनुसार घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए रिक्शे नगर निगम को उपलब्ध कराने थे। नगर निगम ने स्वाले नगर की जय किसान फर्म के मालिक राशिद से लोहे के रिक्शे खरीदने का अनुबंध किया। प्रारंभिक चरण में करीब 250 लोहे रिक्शे 17800 रुपये प्रति रिक्शा की दर से 44.50 लाख में खरीदे गए हैं। बांसमंडी के रिक्शा व्यवसायी अकील के मुताबिक नगर निगम ने जिस तरह के रिक्शे खरीदे हैं, वजन के हिसाब उनकी कीमत 10 से 11 हजार रुपये है। वह इतनी ही रकम में ऐसे रिक्शे उपलब्ध करा देते। पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा के मुताबिक 70 वार्डों में कूड़ा उठवाने के लिए एक हजार रिक्शे खरीदे जाने हैं। मगर, रिक्शा खरीद का उनसे कोई मतलब नहीं है। ये काम स्टोर विभाग कर रहा है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि एक हजार रिक्शे इसी फर्म से खरीदे जाते हैं तो इसके लिए नगर निगम को 1.78 करोड़ रुपये चुकाने होंगे जबकि इसी वजन के लोहे के रिक्शे दूसरी फर्म से खरीदने पर इनकी कीमत एक करोड़ से ज्यादा नहीं होगी।

पहले बकेट, फिर कवर्ड, अब ई रिक्शा
रिक्शा खरीद में गोलमाल इसी से समझा जा सकता है कि पहले बकेट वाले रिक्शे खरीदे गए। चार महीने में वही वह स्टोर में पहुंचकर कंडम हो गए। अब ये रिक्शे यहीं स्टोर में सड़ रहे हैं। इसके बाद लोहे के कवर्ड रिक्शे ज्यादा कीमत में खरीदे जा रहे हैं। इसी बीच 90 हजार कीमत का बैट्री चालित ई रिक्शा ट्रायल के तौर पर मंगवाया गया है। अगर ई रिक्शा खरीदा जाता है तो लोहे के रिक्शे फिर कंडम साबित कर गोदाम में सड़ने के लिए भेज दिए जाएंगे।
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‘ रिक्शा खरीद में गड़बड़ी की जांच होगी। अब तक डोर टू डोर कूड़ा योजना की ठीक से मानीटरिंग नहीं हो पाई। अफसर स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में लगे थे। अब सख्ती से मानीटरिंग कराकर योजना को कामयाब बनाया जाएगा।’ डा. आईएस तोमर, मेयर
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