महाभारतकालीन लिलौर झील की सफाई के काम में हुए घपले में निलंबित तत्कालीन एक्सईएन समेत सात अभियंताओं के खिलाफ संशोधित चार्जशीट शासन को भेजी गई है। पहले भेजी गई चार्जशीट में कुछ खामियां बताकर शासन ने उनको वापस कर दिया था। सातों निलंबित अभियंताओं की संशोधित चार्जशीट तैयार करने में दो महीने से भी लंबा वक्त लगा।
सपा शासन में चार साल पहले लिलौर झील की सफाई के लिए शासन ने 8.5 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था। भाजपा की सरकार बनने के बाद सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के निर्देश पर विभाग के प्रमुख सचिव सुरेशचंद्रा ने खुद आकर जांच की थी। इसमें काम को गैर जरूरी ढंग से 29 टुकड़ों बांटने समेत कई घपले सामने आए थे। घोटाले के आरोपों में तत्कालीन एसई काजिम अली और जीवनराम को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी। एक्सईएन रामबहादुर यादव समेत पांच सहायक अभियंताओं राकेश कुमार, कौशल किशोर, आशीष रंजन, प्रदीप कुमार सक्सेना और हरीश वर्मा समेत तीन अवर अभियंताओं को भी दोषी पाया गया था।