इसमें दरोगा युधिष्ठिर सिंह को दोषी मानते हुए कोतवाली में उसके खिलाफ 20 नवंबर 1997 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में दरोगा को कोर्ट ने 29 मार्च को दोषी करार दे दिया था। कोर्ट ने शुक्रवार को सेवानिवृत्त युधिष्ठिर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
कोर्ट के फैसले से सुकून मिला
दरोगा युध्ष्ठिर सिंह को कोर्ट से सजा मिलने के बाद मुकेश उर्फ लाली के भाइयों ने संतुष्टि जाहिर की। उनका कहना था कि लड़ाई लंबी थी, लेकिन उनके भाई अरविंद जौहरी ने लड़ी। अरविंद वकील थे।
पिछले वर्ष जब उनका देहांत हुआ तो मुकदमा अपने अंतिम चरण में था। फैसला सुनने के लिए मुकेश उर्फ लाली के तीन भाई अनिल जौहरी, राकेश जौहरी व अनूप जौहरी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उनकी मां इस दिन का इंतजार करते करते चल बसीं।