बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध भुता स्थित प्रीति रुरल इंस्टीट्यूट की लापरवाही सामने आई है। महाविद्यालय की ओर से एमए इतिहास तृतीय सेमेस्टर के लगभग 200 विद्यार्थियों की अंकतालिकाएं पिछले तीन-चार महीनों से रुकी हुई हैं। आंतरिक मूल्यांकन के अंक विश्वविद्यालय को समय पर प्रेषित न किए जाने के कारण छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।
पीड़ित विद्यार्थियों ने बताया कि एक विषय के आंतरिक मूल्यांकन के अंक कॉलेज की ओर से विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी कारण विश्वविद्यालय स्तर पर परिणाम रोक दिए गए हैं। अंकतालिकाएं न मिलने से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन और रोजगार संबंधी प्रक्रियाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीन-चार महीनों से लगातार प्रयास के बावजूद कॉलेज प्रशासन कोई संतोषजनक समाधान नहीं दे रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर भी छात्रों को सही जानकारी नहीं मिल रही है। विद्यार्थी समाधान की आस में महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। परेशान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। छात्रों का अनुरोध है कि महाविद्यालय से लंबित आंतरिक मूल्यांकन के अंक शीघ्र मंगाए जाएं। इन अंकों को विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाए।
वर्जन
सभी छूटे हुए विषय के अंक विश्वविद्यालय को मेल व हार्डकॉपी के माध्यम से भेजे जा चुके है, अब तक रुविवि ने ही आठ अगस्त तक अंक भेजने का अवसर दिया गया था, जल्द छात्रों के अंक अपडेट हो जाएगा। - डॉ. नरेश गंगवार, उप प्राचार्य, प्रीति रुरल इंस्टीट्यूट, भुता