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हादसे के लिए स्टेशन मास्टर और गेटमैन हादसे के लिए जिम्मेदार

Fri, 27 Oct 2017 01:41 AM IST
बरेली।
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घ्‍ाायलाों का हालचाल लेते अपऊफसर
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राज्यरानी एक्सप्रेस की गौसगंज रेलवे क्रॉसिंग पर टैंकर से हुई भिड़ंत की जांच के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय संयुक्त समिति ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दे दी है। जांच रिपोर्ट में पीताम्बरपुर स्टेशन मास्टर सुकांत बहोलिया और गौसगंज क्रॉसिंग पर तैनात गेट मैन मो. यासीन को दोषी ठहराया गया है। क्रॉसिंग से गुजर रहे टैंकर को देखने के बाद भी फौरन इमरजेंसी ब्रेक न लेने के लिए राज्यरानी के लोको पायलट को भी जांच रिपोर्ट में जिम्मेदार माना गया है। गेट पर लाल बत्ती लगी मिलने और दृश्यता साफ होने के चलते माना गया कि लोको पायलट अगर फौरन ब्रेक लेता तो गाड़ी क्रॉसिंग से 500 मीटर आगे जाकर नहीं रुकती। 
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जांच समिति में शामिल रेलवे, आरपीएफ और रेलवे इंटेलीजेंस के सदस्यों ने संयुक्त रूप से दी रिपोर्ट में गौसगंज रेलवे क्रॉसिंग की स्थिति का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घटनास्थल पर अप लाइन पर हाथ बत्ती लगी हुई मिली जबकि डाउन लाइन पर हाथ बत्ती टूटी हुई थी। रेलवे क्रॉसिंग का बूम ठीक काम कर रहा था। पीताम्बरपुर स्टेशन के गौसगंज क्रॉसिंग 352/ए/सी पर बूम बंद न होने के कारण डाउन लाइन पर मेरठ जा रही राज्यरानी एक्सप्रेस पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर से टकरा गई थी। जांच टीम को क्षतिग्रस्त इंजन क्रॉसिंग से करीब 500 मीटर आगे मिला था। 

कर्मचारियों के हुए टेस्ट, दस्तावेज सील 
जांच के दायरे में आए लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट और गेटमैन का रात में ही एनालाइजर टेस्ट के साथ खून की जांच कराई गई, लेकिन किसी में एल्कोहल की पुष्टि नहीं हुई। रात में ही गेट पर मौजूद सभी रिकार्ड क्रास चेक करके सील करा दिए गए। इन दस्तावेजों में साफ हो गया था कि पीताम्बरपुर स्टेशन मास्टर सुकांत बहोलिया की तरफ से गेटमैन मोहम्मद यासीन को चाबी और टोकन नहीं दिया गया था। 
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लोको पायलट बोला.. गायब था गेटमैन
जांच टीम ने लोको पायलट मुकुंद और असिस्टेंट लोको पायलट बृजेश के बयान दर्ज कराए, जिसमें कहा गया कि गेटमैन क्रॉसिंग पर मौजूद नहीं था। ट्रेन आने पर गेटमैन की तरफ से ट्रेन को रोकने का कोई प्रयास नहीं हुआ। हालांकि गेटमैन मोहम्मद यासीन ने जांच टीम के सामने कहा कि ट्रेन को आते हुए देखकर वह गाड़ी की तरफ दोनों हाथ में लाल बत्ती लेकर दौड़ा था। गेट पर लाल बत्ती बचाव के लिए लगाई थी। 

अंतिम बार 6.10 बजे बंद हुआ था गेट 
दस्तावेज की जांच में सामने आया कि 25 अक्तूबर को अंतिम बार शाम 6.10 बजे क्रॉसिंग को बंद किया गया था। इस समय काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस क्रॉसिंग से गुजरी थी। इसके लिए पीताम्बरपुर के स्टेशन मास्टर की तरफ से टोकन और चाबी भेजी गई थी। इसके बाद ऐसा कोेई रिकार्ड नहीं मिला।   
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जांच टीम गठित की गई है। स्टेशन मास्टर और गेटमैन को घटना के बाद सस्पेंड किया जा चुका है। घायलों को मुआवजा दिया गया है। हादसा दुखद है।
- एके सिंघल, डीआरएम मुरादाबाद मंडल  


टूटा हुआ था बूम का लॉक फिर भी बिना कॉशन गुजर रही थीं ट्रेनें
मुख्य सुरक्षा अधिकारी की जांच में खुली असलियत

चेन से बूम को बांधकर निकाली जा रही थीं ट्रेनें 

फरीदपुर। बड़ौदा हाउस दिल्ली से मुख्य सुरक्षा अधिकारी नीरज कुमार गौसगंज क्रॉसिंग पर पहुंचने के बाद चौंक गए। यहां बूम का लॉक ही टूटा हुआ था फिर भी ट्रेनों को बगैर कॉशन के गुजारा जा रहा था। उन्होंने स्टेशन के जिम्मेदारों से सवाल किए तो सभी ने अनभिज्ञता जता दी गई। नीरज कुमार ने इस लापरवाही के लिए अधिकारियों को आड़े हाथ लिया। इसके बाद पीताम्बरपुर स्टेशन पर निरीक्षण में सामने आया कि यहां चार एसएस का स्टाफ होना चाहिए, जिसमें एक पद खाली चल रहा है। 
मुख्य सुरक्षा अधिकारी को बताया गया कि पीतांबरपुर के स्टेशन मास्टर मो. हनीफ तीन दिन की छुट्टी लेकर गाजियाबाद गए थे। जिसके बाद प्रभार सुकांत बहोलिया को दिया गया था, जिन्हें सांस की बीमारी थी। मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने रिकार्ड देखकर पूछा कि वह पूरा काम कर सकते हैं, यह सुनिश्चित नहीं किया गया था। बड़ी चूक यह भी सामने आई कि काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस आने के वक्त तो गेट बंद किया गया था, लेकिन उसके बाद टोकन नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, राज्यरानी आने के वक्त पीताम्बरपुर स्टेशन से लगे अधिकारियों को को टोकन चाबी दी गई, लेकिन गौसगंज क्रॉसिंग को नहीं दी गई। इसी वजह से हादसा हुआ। स्टाफ ने बचाव करते हुए कहा कि एक ही एसएम सारा काम देखता है, टिकट बांटने के लिये दस से पांच बजे तक क्लर्करहता है पर उसके बाद एसएम को ही टिकट बांटने पड़ते है। 
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