- वैज्ञानिकों ने शोध संबंधी विभिन्न मुद्दों पर साझा किए विचार, दिया प्रस्तुतीकरण
बरेली। पशुओं को बीमारियों से निजात दिलाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर ने कई नैदानिकी, वैक्सीन, पशु आहार तैयार किए हैं। अब एनाप्लाज्मा, थर्मोस्टेबल टीके का विकास, कीटनाशक, खरपतवार नाशक दवा की विषाक्तता की पहचान के लिए फील्ड टेस्ट, बीमारी अलार्म सिस्टम, ब्रुसेल्ला ग्रस्त पशु प्रबंधन, पशुपालन में कृत्रिम बुद्धिमता का प्रयोग आदि विषयों पर शोध की जरूरत है।
आईवीआरआई में आयोजित पहली फाॅलोअप इंटरफेस मीट में इन विषयों पर शाेध का अनुरोध कई राज्यों के पशुचिकित्सा निदेशकों ने किया। केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री प्रो. एसपी बघेल ने पशुओं को खुरपका, मुंहपका रोग से निजात दिलाने, कृत्रिम गर्भाधान से सिर्फ बछिया का जन्म सुनिश्चित करने, उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने की पहल करने का आग्रह किया। निदेशक डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान की उपलब्धियों को बताया। संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ. रूपसी तिवारी ने शोध योग्य मुद्दे, प्रशिक्षण, लैब स्थापना आदि की जानकारी दी।
पशु चिकित्सा संबंधी कई विषयों पर हुई चर्चा
पशुजन स्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. किरण भीलेगांवकर ने पशुधन में रोगाणुरोधी प्रतिरोध से लड़ने की रणनीति, मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रणव धर ने उभरती और सीमापारीय पशु रोग की चुनौतियां, प्रभाव, रोकथाम के लिए वैश्विक रणनीति, पशुपोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. सुनील जाधव ने वैकल्पिक चारा संसाधन, डाॅ. मेराज हैदर खान ने पुनरूत्पादन की नवीन तकनीक, आईटीएमयू प्रभारी डाॅ बबलू कुमार ने तकनीकी पोर्टफोलियो पेश किया। अमर उजाला ब्यूरो