ऐसे बढ़ाते थे मेलजोल
आरोपी खुद को शिक्षक और धार्मिक उपदेशक बताकर गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के बहाने परिवारों से मेलजोल बढ़ाते थे। तीनों आरोपी बच्चों को धार्मिक ग्रंथ पढ़ाते थे। पुलिस ने मौके से बच्चों की हस्तलिखित कॉपियां भी बरामद करके सील की हैं। इनमें टेस्ट कॉपी की तरह सवाल और जवाब के कॉलम बने हैं।
बच्चों से टेस्ट में ईसाई धर्म के इतिहास से संबंधित प्रश्न पूछे जाते थे। इसमें मिले अंकों के आधार पर बच्चों को खाने-पीने की चीजें दी जाती थीं। बच्चों को नए खेल भी सिखाए जाते थे। इस वजह से बच्चे इनके पास जाते थे। बच्चों से पढ़ाई से पहले धर्म विशेष से जुड़ी प्रार्थना भी कराई जाती थी।
फंडिंग तो नहीं, टीम गठित कर होगी जांच : एसएसपी
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि धर्म परिवर्तन या उसका प्रयास गंभीर अपराध है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी। कहा कि ऐसे मामले में कहीं से फंडिंग होने की भी आशंका रहती है। टीम बनाकर आरोपियों के खातों व कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कराई जाएगी। विवेचक की मदद के लिए क्राइम ब्रांच के किसी अनुभवी इंस्पेक्टर, एसओजी, सर्विलांस सेल व अकाउंट से जुड़े लोगों को टीम में शामिल किया जाएगा।
अफसरों के पास पहुंची पैरवी
पादरी व चर्च से जुड़े कुछ लोग सोमवार को एसएसपी के पास पहुंचे। इन्होंने आरोपियों को निर्दोष बताकर छोड़ने की गुहार की। उनके साथ पहुंचे कुछ कथित मीडियाकर्मियों ने भी जोर दिया कि मामला धर्म परिवर्तन का नहीं है। रिपोर्ट गलत तरीके से दर्ज की गई है। तब एसएसपी ने इन लोगों से कहा कि मामला पूरी तरह से धर्म परिवर्तन का है। मौके से इस तरह के साक्ष्य भी मिले हैं। बचाव में कोई साक्ष्य देना चाहे तो दे सकता है। उसे विवेचना में शामिल करा लिया जाएगा।