बरेली। आम तौर पर लोग तब हज पर जाते रहे हैं जब वह अपनी तमाम जिम्मेदारियों के बरी हो जाते हैं, इसलिए हज पर जाते जाते उनकी उम्र 60 या इससे पार कर जाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से युवाओं का हज जाने में रुझान बढ़ा है। इस बार सबसे ज्यादा युवा हज यात्रा पर जा रहे हैं। हज यात्रा पर जाने को लेकर लोगों के घरों पर जश्न माहौल है।
हज हर शरई मालदार पर फर्ज है। इस फर्ज को अदा करने के लिए दुनिया भर से बड़ी संख्या में लोग सऊदी अरब जाते हैं। इसमें हिंदुस्तान से भी लाखों लोग हज के लिए जाते हैं। इस बार भी जा रहे हैं, इसे लेकर तमाम आजमीनों के घरों में जश्न का माहौल है। कहीं आजमीन खुद मिलने जा रहे हैं तो कहीं तमाम मिलने जुलने वाले और रिश्तेदार उनके घरों पर पहुंच रहे हैं। हार फूल पहनाकर उन्हें मुबारकबाद पेश करने का सिलसिला बना हुआ है। यह माहौल जसोली के रजी कुरैशी, कुंवरपुर की अख्तरी बेगम, अबरार हुसैन, इस्लामिया गर्ल्स की प्रवक्ता बिलकीस बेगम आदि के घर पर देखने को मिला।
इसमें युवाओं की बात करें तो इस बार सौ से भी ज्यादा ऐसे आजमीन हैं जिनकी उम्र 40 साल से भी कम है। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। नासिर कुरैशी के अनुसार जसोली के शारिफ अली (35 वर्ष), जसोली के रजी कुरैशी (26 वर्ष), घेर शेख मिट्ठू के मौलाना कैसर रजा (35 वर्ष), बाग ब्रिगटान के इकराम कुरैशी (32 वर्ष) एवं पत्नी पोशिश इकराम (22 वर्ष), आजम नगर की समरीन (30 वर्ष) आदि के घरों पर हज पर जाने का जश्न देखते ही बन रहा है।