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30 साल बाद शनि का राशि परिवर्तन, बढ़ेगी महंगाई, सुधरेगी न्याय व्यवस्था

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ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मौनी अमावस्या पर सालों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
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बरेली। न्याय के देवता शनिदेव मौनी अमावस्या के दिन 24 जनवरी यानी आज अपनी स्वराशि मकर में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक शनिदेव ढाई साल तक एक राशि में रहते हैं, इस तरह करीब 30 साल बाद वापस मकर राशि में आ जाते हैं। इससे पहले ऐसा संयोग 15 दिसंबर 1990 को हुआ था। अब 29 अप्रैल 2022 को शनि राशि बदलेगा और कुंभ में प्रवेश करेगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक, शुक्रवार को सुबह 9.26 बजे अमावस्या के संयोग पर शनि, चंद्रमा के बेहद करीब आ जाएगा। चंद्रमा के पास शनि जीरो डिग्री पर रहेगा। इस तरह पृथ्वी, चंद्रमा और शनि तीनों एक लाइन में आ जाएंगे। शनि का चंद्रमा के पास आना सामान्य घटना है, लेकिन इस अमावस्या पर अपनी ही राशि में प्रवेश करते हुए शनि का चंद्रमा के पास आ जाना दुर्लभ संयोग है। बताया कि इस माघी अमावस्या यानी मौनी अमावस्या पर सूर्योदय के समय गंगा या अन्य नदियों में स्नान को पवित्र माना गया है। इस दिन मौन धारण करने से आध्यात्मिक विकास होता है। मकर राशि में शनि के आने से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। धनु और मकर राशि पर पहले से साढ़ेसाती चल रही मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया रहेगी। यानी तुला राशि पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी और मिथुन राशि के साथ षडाष्टक योग बनेगा। मीन और कर्क राशि पर भी शनि की दृष्टि रहेगी। इस तरह 12 में से 7 राशियां पूरी तरह शनि से प्रभावित रहेंगी।
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वृश्चिक, वृष और कन्या राशि को राहत
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शनि की चाल बदलने से वृश्चिक राशि से साढ़ेसाती खत्म होगी। वृष और कन्या राशि वाले भी शनि की ढैया से मुक्त हो जाएंगे। शनि के राशि परिवर्तन होने से धनु राशि पर साढ़ेसाती तो रहेगी, लेकिन इस राशि वालों पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। धनु राशि पर साढ़ेसाती के आखिरी ढाई साल होने से तरक्की, पद, प्रतिष्ठा और धन लाभ के योग बन रहे हैं।
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11 मई से 28 सितंबर तक वक्री रहेंगे शनि
डॉ. शंखधार के मुताबिक शनिदेव 11 मई से 28 सितंबर तक मकर राशि में ही वक्री रहेंगे। बताया कि शनि के मकर राशि में आ जाने से अध्यात्म के क्षेत्र में रुके हुए काम पूरे होंगे। पेट्रोल, सोना, चांदी, लोहे के दाम बढ़ने और उद्योग-धंधों में तेजी आ सकती है। निर्माण कार्यों में मंदी और खाद्यान्न सामग्री के भावों में गिरावट आने और कृषि क्षेत्र में उन्नति और नए प्रयोग हो सकते हैं। राजनीति से जुड़े लोगों में टकराव बढ़ सकता है, लेकिन कई क्षेत्रीय दलों का दबदबा भी बढ़ सकता है। सीमा पर तनाव बरकरार रह सकता है। हालांकि, शनि न्याय के देवता हैं इसलिए देश की न्याय प्रणाली और ज्यादा मजबूत होने की संभावना है।
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