बरेली। सुनहरी, रुपहली रंग बिरंगी लाइटों से सजी पुराना शहर की सड़कें, झिलमिलाती झालरें और कुमकुमों के बीच गूंजती नातो मनकबत और इस्लामी नारों के साथ जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। इसमें शामिल नायाब अंदाज की पोशाकों में झूमते नबी के दीवाने हाथों में इस्लामी पैगाम की तख्तियां लिए चलते रहे। जो अमनो मोहब्बत का संदेश दे रहे थे। इसमें शामिल सजी बाइकों पर सवार युवा और झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर यह जुलूस अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लिमीन की ओर से निकाला गया। इसमें जुलूस कमेटी ने कमर चिश्ती को परचम देकर रवाना किया। खानकाह तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां की कयादत में यह जुलूस मीरा की पेंठ, बुखारपुरा बजरिया इनायत खां, कांकरटोला, शाहदाना, शहामतगंज आदि रास्तों से होता हुआ सैलानी रोड से छह मीनार मस्जिद पर संपन्न हुआ।
जुलूस में शामिल अंजुमन लशकरे रजा के सदस्य सड़क पर झाडू लगाते, लोबान की सुगंध बिखेरते और फूलों की बारिश करते चल रहे थे। फूलों की सलामी देती तोप भी आकर्षण का केंद्र रही। तरह तरह के इस्लामी मॉडल जुलूस की खूबसूरती को बढ़ा रहे थे। अंजुमन लश्करे मुस्तफा इस दौरान गरीबों को कंबल बांटती रही। इस जुलूस में फैजाने नियाजिया की ओर से डॉ. कासिम नियाजी के नेतृत्व में हरे लिबास में एक टोली शामिल हुई। मंच का संचालन तारिक सईद ने किया और हाफिज नियाज अहमद ने आभार व्यक्त किया। निर्णायक मंडल में सैयद मोहसिन आलम, तौकीर सिद्दीकी, फुरकान खान, यामीन राईन रहे। देर रात पुरस्कार वितरण किया गया।
इनकी की गई दस्तारबंदी
बरेली। जुलूस से पहले कायदे जुलूस हस्सान मियां ने कमेटी के सरपरस्त नवाब मुजाहिद हसन खां, जाहिद खां, डॉ. एसयू चिश्ती, अलीमुद्दीन, इकरार अहमद, सदर इमशाद हुसैन, महासचिव हाफिज नियाज अहमद, सचिव अंजुम शमीम, हाजी मोहम्मद जफर, निहालउद्दीन, सनव्वर खां, यामीन अहमद, मोहम्मद उस्मान, अनवर हसन की दस्तारबंदी की। इससे पहले कमेटी के लोगों ने जुलूस में शामिल होने वाली अंजुमनों के अध्यक्ष और सचिव की दस्तार की।