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दुख में भगवान का भजन नहीं छोड़ना चाहिए:योगेश ब्रजवासी

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बरेली। कथा व्यास योगेश ब्रजवासी ने कहा कि दुख में भगवान का भजन नहीं छोड़ना चाहिए। चार साल की आयु में ध्रुव के सिर से मां का साया उठने के बाद सौतेली मां ने काफी कष्ट दिए, फिर भी उन्होंने प्रभु का नाम लेना नहीं छोड़ा। नारद मुनि के महामंत्र से ही ध्रुव अमर हुए।
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सनातन धर्म मंदिर के वार्षिकोत्सव उत्सव के दूसरे दिन मंदिर परिसर में हुई श्रीमद्भागवत में उन्होंने कहा कि नारद मुनि ने ऊं नमो भगवते वासुदेव वाय नम: महामंत्र दिया था जिसका जाप वह हर समय करते थे। यही कारण था कि उन्हें दुख में भी कष्ट का अहसास नहीं हुआ। इसी तरह से हिरणाकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को जलती चिता में डाल दिया था, इसके बाद होलिका में जलाने की कोशिश की, लेकिन प्रभु ने उनकी रक्षा की। मीरा भी विष पीकर अमर हो गई। उन्होंने कहा कि विपत्ति में धैर्य रखने और भगवान को याद करने पर सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भागवत के बीच में उन्होंने बरसाना जाना है, फिर न लौटना ना, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, काली कमली वाला मेरा यार है आदि भजन सुनाए। कथा के बाद हुई आरती में बिथरी चैनपुर विधायक राजेश मिश्रा, राजेंद्र गुप्ता, अनीता गुप्ता, राकेश नरुला, प्रोमिला नरुला, संजीव चांदना, मनमोहन सब्बरवाल, भावना, सपना, मधुलिका, नीलम कोचर, सनी कोचर आदि उपस्थित थे।
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