बरेली। उगऽ हे सूरजदेव अरघ के बेरिया.. दर्शन देहू न अपार हे दीनानाथ... लोक आस्था और सूर्योपासना के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाय के साथ गुरुवार से शुरू हुआ। एक नवंबर को खरना और दो नवंबर को भगवान भास्कर को पहला सायंकालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। खरना के बाद छठ वर्ती 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखेंगे। तीन नवंबर को प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा।
गुरुवार को व्रती प्रसाद बनाने के लिए गेहूं सुखाने के अलावा घरों में अन्य तैयारियां की गईं। प्रसाद बनाने के लिए बर्तन धोए गए और पवित्र जल भरकर रखा गया। नहाय-खाय पर छठ व्रती ने अरवा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी खाई। यहां बता दें कि नहाय-खाय के दिन खासतौर पर कद्दू की सब्जी बनायी जाती है व व्रती इसे ग्रहण करते हैं। कद्दू में पर्याप्त मात्रा में, लगभग 96 फीसदी पानी होता है। इसे ग्रहण करने से कई तरह की बीमारियां खत्म होती हैं। वहीं चने की दाल भी खाई गई। मान्यता है कि चने की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध होती है।
छठ पूजा पर्व चलेगा तीन दिन तक
शुक्रवार को खरना होगा। इस दिन व्रती दिन में केवल एक बार ही खाना खाएगा। इसके लिए कद्दू या सीताफल की सब्जी और पूरी व खीर ही खाई जाती है। खरना में जो प्रसाद तैयार किया जाता है, उसके लिए नया चूल्हा या साफ सुथरी रसोई का ही इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग आम की लकड़ी से ही खाना पकाते हैं। खरना के दिन से ही व्रत शुरू होना माना जाता है।
दो नवंबर को सायंकालीन सूर्य को देंगे अर्घ्य
शनिवार को पूरा दिन व्रत रखने के बाद व्रती शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और रात भर जागकर सूर्य देवता के जल्दी उदय होने की कामना करते हैं। व्रती को सूर्योदय तक पानी तक नहीं पीना होता। इसलिए इस व्रत को काफी कठिन व्रत माना जाता है।
तीन नवंबर को उगते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य
आखिरी दिन तीन नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का पारण हो जाता है। व्रती प्रसाद ग्रहण करता है। इस अवसर पर छठी मइया यानी भगवान सूर्य से आशीर्वाद के लिए बहुत से लोग सपरिवार व्रत रखते हैं।
भास्कर भगवान की मानस बहन हैं षष्ठी देवी
अथर्वेद के अनुसार भगवान भास्कर की मानस बहन हैं षष्ठी देवी। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बालकों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। बालक के जन्म के छठे दिन भी षष्ठी मइया की पूजा की जाती है ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं।
छठ पूजा की सामग्री
प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी।
बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली दूध और गिलास।
नए वस्त्र साड़ी कुर्ता पजामा, धोती और अंगरखा।
चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक।
पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो।
सुथनी और शकरकंदी।
हल्दी और अदरक का पौध।
नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू।
शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी।
कैराव, कपूर, कुमकुम, चंदन, मिठाई।
ठेकुआ, मालपुआ, खीर, पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू प्रसाद
ज्योतिष शास्त्र में छठ को तमाम बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है। सूर्य देव जल्दी ही व्रतियों की मनोकामना सिद्ध करने वाले हैं। अन्न धन के मामले में यह वर्ष सुखद रहने वाला है।
- पंडित मुकेश मिश्रा, ज्योतिषाचार्य नव दुर्गा मंदिर