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विदेशों में मनाया गया मुफ्ती आजम हिंद का उर्स

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बरेली। आला हजरत के साहबजादे मुफ्ती आजम हिंद हजरत मुस्तफा रजा खां का एक रोजा उर्स बतौर उर्स-ए-नूरी मनाया गया। यह उर्स सिर्फ यहीं नहीं बल्कि देश के विभिन्न जगहों के अलावा विदेशों में भी आयोजित किया गया। दरगाह पर हुए सभी आयोजनों में कुल के दौरान अकीदतमंदों की भारी भीड़ रही।
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आला हजरत दरगाह
दरगाह आला हजरत पर उर्स-ए-नूरी दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सदारत में संपन्न हुआ। रात में कुल के बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) ने दुआ की। रात को हुए जलसे में उलमा में अपनी तकरीर में मुफ्ती आजम हिंद को बेसहारों का सहारा बताते हुए उनकी जिंदगी और दीनी व मसलकी खिदमात पर रोशनी डाली। उर्स की शुरूआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। दिन भर मजार शरीफ पर चादरपोशी, गुलपोशी और फातिहाख्वानी का सिलसिला चलता रहा। शाम को मीलाद पाक की महफिल सजाई गई। रात को हुए मुख्य कार्यक्रम में कारी रिजवान, मुफ्ती आकिल रजवी, मुफ्ती सलीम नूरी, मौलाना मुख्तार बहेड़वी, कारी सखावत, कारी यूसुफ रजा संभली, डा. एजाज अंजुम सहित बड़ी तादाद में उलमा ने खिताब किया। देर रात 1:40 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।

ताजुश्शरिया दरगाह
दरगाह ताजुश्शरीया पर उर्स-ए-मुफ्ती आजम हिंद काजीउल कुज्जात फिल हिंद मुफ्ती असजद रजा खां की सरपरस्ती में मनाया गया। जमात के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां की देख रेख में हुए कार्यक्रम की शुरूआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। इसके बाद ताजुश्शरीया की दरगाह पर भी नजर और चादरपोशी का सिलसिला चलता रहा। शाम को मीलाद की महफिल हुई रात में उलमा की तकरीरों का दौर शुरू हुआ। इसमें कुरान की तिलावत कारी शर्फउद्दीन और कारी फैजुल नबीं ने की। इस दौरान मुफ्ती नश्तर फारूकी, मुफ्ती मुस्तफा रूदौलवी, मौलाना जाहिद ने हुजूर मुफ्ती आजम हिंद की जिंदगी पर रोशनी डाली। देर रात 1:40 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। आखिर में मुफ्ती असजद मियां की दुआ के साथ उर्स का समापन हुआ।
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तंजीम उलमा इस्लाम
दरगाह परिसर स्थित नूरी मेहमानखाने में तंजीम उलमा इस्लाम की ओर से मुफ्ती आजम हिंद के उर्स का आयोजन किया गया। रजा एकेडमी के चेयरमैन मौलाना सईद नूरी की सदारत में उर्स कार्यक्रम शुरूआत तिलावते कलाम पाक से हुई। इसके बाद कारी अब्दुर्रमान जियाई, मौलाना हाशिम रजा खां, हाफिज मुजाहिद हुसैन, मौलाना ताहिर फरीदी आदि ने मुफ्ती आजम की जिंदगी और मसलकी खिदमात पर रोशनी डाली। निजामत मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने की।
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