छुरियों और जंजीरों का मातम कर पेश की शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत
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बरेली। इमरोज फलक जारो परेशान हुसैन अस्त। अफलाक सिया पोश शहीदाने हुसैन अस्त।। लकड़ी के गुटकों की धुन पर फारसी का यह मरसिया पढ़ते हुए कुमार टाकीज चौक पर बच्चे और युवाओं ने कमा और छुरियों से मातम शुरू किया। देखते-देखते अजादारों का जिस्म छलनी हो गया और आसपास की जमीन खून से लाल होने लगी। जरीदों के जुलूस में यह मंजर देखने के लिए आसपास की भारी भीड़ जमा हो गई। राह से गुजरते लोग रुक गए, लोगों की सांसें थम गईं, वहां खड़े तमाम लोगों की जुबान से या हुसैन या हुसैन खुद ब खुद निकलने लगा। थोड़ी देर में हर तरफ सिर्फ या हुसैन की सदाएं गूंजने लगीं। यहां से नौहा पढ़ती हुई अंजुमन के साथ जुलूस आगे बढ़ा और फिर यहीं मंजर मनिहारों की गली में इमामबाड़ा हसनैन साहब पर देखने को मिला। इस तरह अंजुमन शमशीरे हैदरी और आल इंडिया गुललदस्ते हैदरी के सदस्यों ने मातम करते हुए अपने लहू से शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया।
मोहर्रम की आठ तारीख हजरत इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की शहादत से मंसूब है। इसी याद में लगभग पौने दो सौ साल पुराना जरीदों का जुलूस इमामबाड़ा फतेह निशान से निकाला गया, जो बाजार संदल खां होता हुआ जामा मस्जिद पहुंचा। यहां रोड पर मौलाना शहवार हुसैन नकवी ने हजरत इमाम हुसैन कुर्बानी और इस्लाम के पैगाम इंसानियत को आम किया। साथ ही हजरत अब्बास किरदार और उनकी शहादत का वर्णन किया। इसके बाद जुलूस जखीरा होते हुए मलूकपुर इमामबाड़ा फतेह निशान पर पहुंचा। यहां पर मौलाना सफी असगर ने इस्लाम के हवाले से इत्तेहाद और मुल्क से मोहब्बत का पैगाम दिया। यहां जुलूस अपने रास्तों से कुमार टाकीज के पास जज साहब के इमामबाड़े पर पहुंचा। यहां अंजुमन शमशीरे हैदरी और आल इंजिया गुलदस्ते हैदरी ने नौहा ख्वानी की। यहीं से निकल कर चौक पर मातम किया। जुलूस में दूसरी भी तमाम और भी अंजुमनें शामिल रहीं
यह जुलूस मनिहारों की गली से शाहबाद में जामा मस्जिद मुतवल्ली नन्हें रिजवी के इमामबाड़े पहुंचा। यहां अली हशिम जैदी ने नौहाख्वानी की। इसके बाद जुलूस नाले मार्ग से होता हुआ नीम की चढ़ाई से कंधी टोला पहुंचा जहां समीर रिजवी के इमामबाड़े पर नजरे इमाम हुआ। यहां से वापस काला इमामबाड़ा पहुंच कर जुलूस संपन्न हुआ। यहां पर हजरत अलम बरदार के ताबूत की जियारत कराई गई। इस मौके पर मौलाना समर हैदर आब्दी, डा. अदीब, जिया मेंहदी, सफदर अली काजमी, महमूद हसन नकवी, जमाल जैदी, बाकर जैदी, शानू काजमी आदि मौजूद रहे।