बरेली। सऊदी अरब सरकार ने उमरा पर जाने वालों से ठगी रोकने के लिए नई नीति बनाई है, मगर यह नीति उमरा पर जाने वाले यात्रियों पर भारी पड़ेगी। इसे लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि सुविधा के लिए नीति बनाने में कोई हर्ज नहीं मगर यात्रा मंहगी न हो।
बताया जाता है कि नई उमरा नीति के अनुसार वीजा यात्रियों को ठहरने वाले होटल व परिवहन सेवा का उल्लेख करना होगा। सऊदी अरब सरकार अधिकृत एयरपोर्ट पर उतरते ही वहां मौजूद होटल व परिवहन सेवा उपलब्ध होने से उन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वीजा में दर्ज ट्रांस्पोर्ट की बस वहीं मिलेगी, जिसमें बैठा कर संबंधित होटल तक पहुंचाएंगे। सभी बसों की दर एक जैसी होगी। इससे दलालों की दुकानें बंद होंगी। जिन्हें लाइसेंस होगा वही सऊदी अरब से नए नियम इशु करा पाएंगे।
इस नई नीति के लागू होने से उन्हें जरूर परेशानी होगी जिन्होंने एक दो साल पहले रियायत दरों पर सुविधा का झांसा देकर बुकिंग कर ली थी। नई नीति में दी गई सुविधा के कारण उमरा यात्रा महंगी हो जाएगी। जो उमरा पहले 50 से 60 हजार रुपये में हो जाता था वह अब 60 से 65 हजार रुपये से भी ज्यादा का पड़ेगा। इससे आम लोगों को जेब पर असर पडे़गा। अलबत्ता सभी टूर एजेंसी की दर एक समान हो जाएगी।
इधर बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खान वारसी ने सऊदी अरब हुकूमत से उमरा यात्रा सस्ती और आसान करने की मांग की है। ताकि आम आदमी भी आसानी से उमरा पर जा सके। साथ रिपीटर से जो दो हजार रियाल टैक्स लगा रखा उसे भी खत्म करने की मांग की है।
नई उमरा नीति पर रोक लगाने की मांग
बरेली। नई उमरा नीति के खिलाफ फैजाने नियाजिया वेलफेयर सोसाइटी की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। इसमें मांग की गई है कि सऊदी अरब सरकार ने इस वर्ष उमरा की नई नीति लागू की है। इससे डेढ़ से दो गुना खर्च बढ़ने जा रहा है। इसमें खास तौर से तीन साल में एक से ज्यादा उमरा करने पर दो हजार रियाल लिया जा रहा है वह भारतीय मुद्रा के अनुसार 40 हजार रुपये होता है। यह अतिरिक्त फीस का प्रावधान खत्म करने और दूसरी नई शर्ते खत्म करने के लिए अनुरोध किया गया। यह ज्ञापन सोसाइटी के अध्यक्ष हमजा मियां नियाजी के नेतृत्व में दिया गया। साथ में आसिम हुसैन, हाजी जावेद साबरी, अफजाल बेग, मुहम्मद राशिद नियाजी, हसीन नियाजी, आफताबुन नबी, नोमान मलिक आदि मौजूद रहे।