बरेली। वर्ष 2025 के दंगे के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा की रिहाई पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों के जाल में फंसकर रह गई। साजिश रचने में उसके करीबी रहे अन्य सिपहसालार भी जमानत नहीं पा सके।
आई लव मोहम्मद को लेकर शुरू हुए विवाद में 26 सितंबर 2025 को शहर में दंगा भड़का था। पुलिस टीमों पर तेजाब और पेट्रोल बम से हमले कर हथियार लूट लिए गए थे। पुलिस जांच में मौलाना तौकीर रजा खां और डॉ. नफीस की भूमिका दंगों के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आई थी। दंगे कराने में इनके अन्य साथियों की भूमिका भी थी। मौलाना तौकीर रजा, डॉ. नफीस और इनके गुर्गों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तभी से दोनों जेल में हैं।
माहौल को भांपकर पुलिस ने पहले ही बड़ी कार्रवाई का खाका खींच दिया था। प्रेमनगर, कोतवाली, बारादरी और कैंट थाने में दर्जनभर रिपोर्ट दर्ज की गई थीं। दंगे से जुड़े इन मुकदमों की विवेचना की खास निगरानी की गई। कई दंगाइयों ने नाम निकलवाने की कोशिश की, लेकिन मजबूत निगरानी ने मंसूबों पर पानी फेर दिया। विवेचना के दौरान पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य एकत्र किए जो उनके गले की फांस बन गए हैं।
पुलिस ने विवेचना के दौरान तेजाब और पेट्रोल से सने कांच के टुकड़े, कारतूस के खोखे, ईंट-पत्थरों के टुकड़े, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो आदि साक्ष्य एकत्रित किए। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता ने साक्ष्यों का हवाला देकर जमानत अर्जी का विरोध किया। इस कारण मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा खां और डॉ. नफीस को जमानत नहीं मिल सकी।
इससे पहले भी मौलाना तौकीर की दंगे से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत खारिज हो चुकी है। मौलाना तौकीर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत याचिका लगाई गई थी जो चार्जशीट में दिए गए सबूतों के आधार पर खारिज कर दी गई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपपत्र में ऐसे साक्ष्यों और गवाहों को शामिल किया है, जिनके आधार पर दंगाइयों को बड़ी सजा हो सकती है।
एक दर्जन मुकदमों में आरोपी है तौकीर रजा
बवाल के बाद शहर के विभिन्न थानों में दंगाइयों के खिलाफ सिलसिलेवार दर्जनभर रिपोर्ट दर्ज की गई थीं, ताकि कोई आरोपी बचने न पाए। दंगा कराने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं को एक साथ कई मुकदमों में आरोपी बनाया गया, जिससे उनके बच निकलने के रास्ते बंद हो गए। मौलाना तौकीर रजा खां करीब एक दर्जन मुकदमों में आरोपी है। उसके खिलाफ पहले से भी मामले दर्ज हैं। मौलाना का आपराधिक इतिहास आगे भी जमानत में रोड़ा बन सकता है।
जमानत पर छूटे दंगाइयों पर भी शिकंजा कसेगी पुलिस
जिन दंगाइयों को एक से अधिक मुकदमों में नामजद किया गया था, उनमें से कुछ लोगों को जमानत मिल गई है। इनमें से उन लोगों को चिह्नित जा रहा है, जिनके खिलाफ दो से अधिक रिपोर्ट दर्ज की गई थीं। इन दंगाइयों पर पुलिस आगे कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है जेल से छूटने वाले दंगाइयों की निगरानी हो रही है।
सीएम ने की थी तारीफ
दंगाइयों के इलाज की खुद सीएम योगी कई बार तारीफ कर चुके हैं। सीएम ने हाल ही एक भाषण के दौरान कहा था कि बरेली में एक मौलवी बहुत मचल रहा था। कैसा उपचार हुआ आपने देखा होगा। एक बार उन्होंने कहा था कि उपद्रवियों की सात पीढि़यां याद करेंगी उनको। क्योंकि कभी-कभी बुरी आदतें जाती ही नहीं। इसलिए उनकी डेंटिंग पेंटिंग करवानी पड़ती है कायदे से। सीएम के इन बयानों को बरेली दंगे के बाद पुलिस की कार्रवाई से जोड़कर देखा जाता है।
वर्जन
कुल 68 मामलों में 47 लोगों को जमानत मिली है। बरेली पुलिस की टीम के साथ सरकारी वकीलों ने मजबूती से हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। यही वजह रही जो मुख्य साजिशकर्ताओं को जमानत नहीं मिल सकी। - अनुराग आर्य, एसएसपी