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गुनाहों से छुटकारे की, रात है शब-ए-बारात 

Tue, 09 May 2017 01:31 AM IST
बरेली। 
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गुनाहों से छुटकारे की, रात है शब-ए-बारात  - फोटो : गुनाहों से छुटकारे की, रात है शब-ए-बारात 
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 शब-ए-बारात का मतलब होता है छुटकारे की रात। यानी गुनाहों से निजात की रात है। मजहबे इस्लाम में इस रात की काफी अहमियत बयान की गई है। 
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इस पर शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने मरकजी दारुल इफ्ता से जारी अपने बयान में कहा है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। जैसे कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि ये सारी चीजें इसी रात में तय होती हैं। उन्होंने कहा कि जब शाबान की रात हो तो रात को इबादत कायम करो और दिन को रोजा रखो। क्यों कि दिन में गुरूबे आफताब के वक्त से ही अल्लाह की रहमत आसमाने दुनिया पर नाजिल होती है। 
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मौलाना असजद ने कहा कि अल्लाह का कहना है कि कोई मगफिरत का तलबगार (इच्छुक) है जिसे बख्श दूं, कोई है रिज्क का तलबगार जिसको रिज्क दूं, है कोई मुसीबत में निजात दूं। वो खुद पूछता है। इस मुबारक रात में गुस्ल करना, इबादत के वास्ते अच्छे कपड़े पहनना, सुर्मा व इत्र लगाना, कजा नफिल पढ़ना, मुर्दों की मगफिरत के लिए दुआ करना बेहतर अमाल है। इसके अलावा उन्होंने नसीहत करते हुए कहा कि इस रोज आतिशबाजी करने, बाइक से शहर की सड़कों पर हुड़दंग करने, झूट, गीबत, तमाम रात सोकर गुजारना और इबादत में सुस्ती से परहेज करें।  
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