बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भू अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में घपलेबाजी उजागर हुई तो पीलीभीत के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) की ओर से छह लोगों को रिकवरी के नोटिस भेजे गए। नोटिस का जवाब देने के बजाय वसूली से बचने के लिए घपलेबाज हाईकोर्ट चले गए।
एसएलएओ की ओर से पत्रावलियों को खंगाला गया। हस्ताक्षर का मिलान कर तत्कालीन अधिकारियों के नाम तलाशे गए। अधिकारियों ने एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीनों का निरीक्षण किया, तो पता लगा कि अधिक मुआवजा लेने के लिए घपलेबाजों ने ऐसे स्थानों पर अस्थायी ढांचा खड़ा किया है, जहां जाने के लिए रास्ता ही नहीं है। इन ढांचों के मूल्यांकन का मिलान किया गया, तो पता लगा कि घपलेबाजों ने लेखपालों, लोक निर्माण विभाग की टीम के साथ साठगांठ कर अधिक मुआवजा ले लिया। दो साल पुराने ढांचों को 10 साल तक पुराना दर्शाया गया। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई। शासन की ओर से पीलीभीत के एसएलएओ को घपलेबाजों से वसूली के आदेश दिए गए। इसके बाद एसएलएओ की ओर से साधना सिंह समेत छह घपलेबाजों को नोटिस जारी कर बैंक खाते फ्रीज करा दिए गए। वसूली से बचने के लिए घपलेबाजों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संवाद
मुआवजा अधिक लेने वालों को वसूली का नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद साधना सिंह सहित अन्य सभी हाईकोर्ट चले गए। अब कोर्ट के निर्णय के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया होगी। - विजय वर्धन तोमर, एसएलएओ, पीलीभीत