बरेली। करोड़ाें की लागत से बने तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन न होने के बावजूद उपकरणों की खरीद जिम्मेदारों ने की, मानव संसाधन के बगैर दो चरणों में उपकरण, साज-सज्जा पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च हुए। अब भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग ने अभिलेख मांगे हैं।
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के वरिष्ठ लेखा परीक्षक की ओर से सीएमओ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मानव संसाधन की स्वीकृति और तैनाती न होने से तीन सौ बेड संयुक्त चिकित्सालय के भवन निर्माण, उपकरण पर करीब 86.82 करोड़ की धनराशि का खर्च अलाभकारी का अनुमान है। जिसकी जांच ऑडिट टीम ने चार नवंबर 2023 से 28 नवंबर 2023 तक की थी। जो पोटेंशियल ड्राफ्ट पैराज में चिह्नित है।
ऑडिट में तीन सौ बेड अस्पताल के भवन, उपकरण, साज-सज्जा आदि से संबंधित दस्तावेज की प्रमाणिक रिपोर्ट नहीं है। जबकि इसे भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के लेखा परीक्षा प्रतिवेदन मार्च 2023 में शामिल होना है। लिहाजा, अभिलेखीय साक्ष्य समेत रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
इन बिंदुओं पर मांगी सीएमओ से रिपोर्ट
तीन सौ बेड अस्पताल के भवन निर्माण कार्य लागत को पुनरीक्षित करने, कार्यदायी संस्था के चयन संबंधी शासनादेश की छायाप्रति, उपकरण, साज-सज्जा पर प्रथम चरण में 4.75 करोड़ और दूसरे चरण में 8.26 करोड़ रुपये से हुई खरीद का विवरण आदि मांगे हैं। वांछित सूचना और अभिलेख की छायाप्रति आख्या समेत जल्द उपलब्ध कराने के लिए कहा है ताकि अग्रिम कार्रवाई की जा सके।
धूल फांक रहे वेंटिलेटर समेत महंगे उपकरण
तीन सौ बेड अस्पताल में आईपीडी संचालन के लिए पूर्व में सरकार से जारी करीब 8.26 करोड़ के बजट से डीप फ्रीजर, स्ट्रेचर, बेड, अलमारी, बाईपैप, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर, आईसीयू बेड आदि उपकरणों की खरीद हुई। जो मानव संसाधन न मिलने से करीब दो वर्ष से स्टोर में धूल फांक रहे हैं। शासनादेश के मुताबिक बगैर मानव संसाधन चिकित्सकीय उपकरण की खरीद नहीं हो सकती।
प्रथम चरण में खरीदे सामान का रजिस्टर गायब
वित्त वर्ष 2015-16 में अस्पताल का भवन हैंडओवर नहीं हुआ था फिर भी नियमों का धता बताते हुए करीब 4.75 करोड़ रुपये से चिकित्सकीय उपकरण खरीदे गए। कोरोना के दौरान अस्पताल संचालन की कवायद हुई तो उपकरण खोजे जाने लगे। कुछ मिले, ज्यादातर लापता थे। दो वर्ष पूर्व ऑडिट टीम ने खरीद संबंधी जानकारी मांगी तो रजिस्टर नहीं मिल सका। जांच शुरू होते ही बंद हो गई।
अधूरी तैयारी के साथ ओपीडी हो रही संचालित
तीन भाग में विभाजित तीन सौ बेड अस्पताल के एक हिस्से में तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन मंडलायुक्त की पहल पर ओपीडी संचालन शुरू हुआ। पर जांच सुविधा अभी पटरी पर नहीं आ सकी। सीबीसी, ऑटोमैटिक एनालाइजर, डिजिटल एक्सरे समेत कई उपकरण खराब पड़े हैं। रीजेंट न होने से जांच भी प्रभावित रहती है। फिजिशियन, दंत चिकित्सक, चर्म, नेत्र रोग ओपीडी व रैबीज क्लीनिक चल रहा है। ब्यूरो