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Bareilly News: सब्जियों का निर्यात बढ़ाने के लिए बनेगा पैक हाउस

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बरेली। सब्जियों व फलों का निर्यात विदेशों को हो सके। इसके लिए एक पैक हाउस का निर्माण बरेली में किया जाएगा। इसका फायदा जहां बरेली मंडल के जिलों के किसानों को होगा। वहीं उत्तराखंड के जिलाें के किसान भी इसका उपयोग कर पाएंगे। पैक हाउस बनाने का उद्देश्य निर्यात बढ़ा किसानों की आय बढ़ाना है।
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बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पैक हाउस के निर्माण के लिए बैठक की। इस पैक हाउस में क्या सुविधाएं होनी चाहिए? इसके लिए किसानों के अलावा दूसरे स्टेक होल्डर्स की भी सलाह ली गई। मंडलायुक्त का कहना है कि इस पैक हाउस से मंडल के जिले बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर के अलावा आसपास के लखीमपुर खीरी, रामपुर और उत्तराखंड के नजदीकी जिलों को भी इसका फायदा होगा। सीधे तौर पर जो किसानों और एफपीओ के लिए इससे निर्यात की संभावनाएं बढे़ंगीं।
बैठक में मंडी सचिव प्रभात यादव ने बताया कि नवाबगंज में पैक हाउस बनाने के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है। मंडलायुक्त का कहना है कि किसानों के अलावा निर्यातकों से भी इसको लेकर वार्ता कर लें। उन्हें किस तरह की सुविधाएं यहां चाहिए? इसे भी देखना होगा जिससे सभी सुविधाओं के साथ पैक हाउस को बनाया जा सके। अंतरराष्ट्रीय मानक पैकिंग के दौरान पूरे हों। इसे भी ध्यान में रखते हुए जरूरी मशीनें व अन्य सुविधाएं यहां विकसित की जाएं। एपीडा के डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि पैक हाउस के लिए मंडी परिषद नोडल विभाग रहेगा। उनके पास पैक हाउस के लिए जरूरी जानकारियां भी पूर्व से मौजूद हैं। बरेली से आलू, मिर्च, शिमला मिर्च आदि की संभावना को देखते हुए वाशिंग लाइन की सुविधा भी पैक हाउस में जोड़ने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया से अब प्रगतिशील किसानों को भी जोड़ा जाएगा। 15 मई को दोबारा से बैठक मंडलायुक्त ने बुलाई है जिससे पैक हाउस पर फैसला लिया जा सके। ब्यूरो
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फ्रोजन खाद्य पदार्थ के लिए भी सुविधा रहे
उद्यमियों ने मंडलायुक्त से कहा कि बरेली पैक हाउस में फलों और सब्जियों के अलावा फ्रोजन खाद्य पदार्थ की पैकिंग और निर्यात की सुविधा विकसित की जानी चाहिए। फल और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए भी इस सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। मंडलायुक्त ने जिला उद्यान अधिकारी को निर्देश दिया है कि निजी कंपनी के जरिए फ्रोजन यूनिट के संचालन की संभावना को भी देख लें। स्टेक होल्डर्स ने मांग की कि पैक हाउस की जगह ऐसी होनी चाहिए। जहां बड़े वाहन जैसे ट्रक और कंटेनर आसानी से पहुंच सकें। जरूरी प्रशिक्षण भी किसानों को दिया जाए जिससे निर्यात के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। यूपी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड इसमें सहयोग कर सकता है।
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