बरेली। बच्चे के जन्म से घर में किलकारी गूंजती है, पर जन्मजात दोष किसी जख्म से कम नहीं। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों को इलाज न करा पाने का दर्द सालता रहता है। ऐसे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के जरिये स्वास्थ्य विभाग बच्चों के दिल के छेद समेत तमाम जन्मजात दोषों का निशुल्क इलाज कर निर्धन परिवारों की मुस्कान सहेज रहा है।
बहेड़ी के जाजूनगर निवासी मोहम्मद अजलान के बेटे सहवर के जन्म के बाद पता चला कि उसके दिल में छेद है। सर्जरी में करीब तीन लाख रुपये खर्च बताया गया। आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से वह इलाज नहीं करा पा रहे थे। बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो आरबीएसके का पता चला। मौजूद टीम ने बच्चे की विशेषज्ञ से जांच कराई। पुष्टि के बाद सीएमओ ने इलाज के लिए उसे अलीगढ़ के निजी अस्पताल में रेफर किया। वहां निशुल्क ऑपरेशन व इलाज के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
बरेली निवासी राहुल के बेटे हर्षित के होंठ व तालू जन्म से ही कटे थे। करीब 50 हजार रुपये खर्च की वजह से सर्जरी नहीं करा पा रहे थे। दस माह बाद बुखार आने पर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो निशुल्क इलाज की जानकारी दी गई। बच्चे की सर्जरी आगरा में हुई।
बच्चे चिह्नित करने के लिए 30 टीमें सक्रिय
आरबीएसके के मैनेजर डॉ. पारस ने बताया कि जन्मजात दोषों के निशुल्क इलाज के लिए जिले में 30 टीमें सर्वे कर रही हैं। अब तक करीब 22 सौ स्कूलों, 41 सौ आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब सात लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जो बच्चे जन्मजात दोषों से ग्रसित मिले, उनका निशुल्क इलाज हुआ। बीते सप्ताह विश्व जन्मजात हृदय दोष जागरूकता दिवस पर केंद्रों पर जागरूकता कार्यक्रम हुए।
इन जन्मजात दोषों का होता है मुफ्त इलाज
न्यूट्रल ट्यूब डिफेक्ट, डाउन सिंड्रोम, क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट, डिस्पैलेसिया ऑफ हिप, कैटरैक्ट, डेफ, हार्ट डिजीज, रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी, ओटिटिस, रिएक्टिव एयरवे डिजीज, डेंटल, ऑटिज्म, लेप्रोसी समेत 38 जन्मजात दोषों का निशुल्क इलाज होता है। डॉ. पारस के मुताबिक अगर किसी बच्चे में कोई जन्मजात दोष है तो वे निशुल्क इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। ब्यूरो